Ranchi News : पहचानते नहीं हो क्या कौन हूं मैं...मैं मंत्री, विधायक, नेता और पुलिस अधिकारी हूं....भाषा संभालकर बात कीजिए...अक्सर बड़े पदों पर बैठे लोग अपने से नीचे वालों से बातचीत के दौरान इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं. बातचीत के दौरान ऐसी अमर्यादित भाषा भी बोलते हैं, जिन्हें खबर में लिखना मुश्किल है.
झारखंड की सियासत और सरकारी तंत्र में भाषा की मर्यादा को लेकर उठते विवादों की तस्वीर कुछ ऐसी ही है. सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों के बीच होने वाली बातचीत जब मर्यादा की सीमा लांघने के आरोपों में घिरती है, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति के व्यवहार का नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली और भाषा पर उठता है.
झारखंड में नेताओं, मंत्रियों, अफसरों और पुलिसकर्मियों की भाषा और व्यवहार को लेकर विवाद कोई नया नहीं है. कभी वायरल ऑडियो चर्चा में आता है, तो कभी वीडियो. कई मामलों में शिकायत, FIR या विभागीय कार्रवाई तक की नौबत आई है. हालांकि हर मामले में आरोपों को अंतिम सच मानना उचित नहीं है. कई लोगों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार भी किया है.
गांव में बुजुर्गों की एक कहावत है कि “जैसन बांस, बांसौरा, वैसन सूप-दउरा” यानी बड़े जैसा आचरण करते हैं, उसका असर समाज और अगली पीढ़ी पर भी पड़ता है. झारखंड में सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की भाषा को लेकर सामने आते विवाद इस कहावत को याद करने पर मजबूर करते हैं.
जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी का वायरल ऑडियो
ताजा मामला डुमरी विधायक जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच कथित गाली-गलौज से जुड़ा है. दोनों के बीच बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया है. इसको लेकर पुलिस महकमे में भारी नाराजगी है.
पुलिस संगठनों की ओर से जयराम महतो पर कार्रवाई करने और माफी की मांग की गई है. दूसरी ओर जयराम महतो ने ऑडियो को एडिटेड बताते हुए आरोपों से इनकार किया है. मामले में FIR दर्ज होने की बात सामने आई है. यानी इस मामले का अंतिम सच जांच के बाद ही सामने आएगा.
मुख्य सचिव से लेकर DGP तक दे चुके हैं गाली
जयराम महतो प्रकरण ने झारखंड में भाषा और व्यवहार से जुड़े पुराने विवादों को भी फिर चर्चा में ला दिया है. हाल के दिनों में मुख्य सचिव अविनाश कुमार और पूर्व DGP अनुराग गुप्ता से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
ऑडियो में बातचीत के दौरान कुछ पत्रकारों और नेताओं के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया. राजनीतिक स्तर पर भी इस रिकॉर्डिंग को लेकर सवाल उठाए गए. राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक और पुलिस पदों पर बैठे लोगों की कथित बातचीत भी अगर भाषा की मर्यादा के सवालों में घिर जाए, तो आम आदमी किससे आदर्श आचरण की उम्मीद करे.
पूर्व DGP अनुराग गुप्ता का नाम इससे पहले भी एक विवादित ऑडियो प्रकरण में सामने आ चुका है. 2016 के राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद के दौरान उनकी बातचीत का कथित ऑडियो सामने आया था, जिसे लेकर उस समय राजनीतिक विवाद काफी गहरा गया था.
हालांकि यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा. हर आपत्तिजनक टिप्पणी को सीधे “गाली” कहना सही नहीं है. लेकिन सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की भाषा और आचरण पर सवाल उठना अपने आप में गंभीर विषय है.
रघुवर दास का 'बेटी-रोटी' बयान भी रहा विवाद में
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भी मुख्यमंत्री रहते अपने एक बयान को लेकर विवादों में रहे थे. गढ़वा में दिए गए भाषण में ब्राह्मण समाज के संदर्भ में “बेटी-रोटी” शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर विरोध हुआ था और मामला अदालत तक पहुंचा. इसे किसी व्यक्ति को गाली देने की घटना कहना सही नहीं होगा. यह एक विवादित टिप्पणी थी, जिसने सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी थी.
विधायक चमरा लिंडा पर भी लगे थे दुर्व्यवहार के आरोप
2013 में तत्कालीन विधायक चमरा लिंडा पर विधानसभा परिसर में ड्यूटी कर रहे एक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे. मामला पुलिस कार्रवाई तक पहुंचा था. यह घटना भी इस बात की ओर इशारा करती है कि जनप्रतिनिधियों व पुलिस के बीच टकराव और भाषा व व्यवहार की मर्यादा को लेकर विवाद झारखंड में पुराना है.
पूर्व मंत्री कृष्णानंद त्रिपाठी पर बॉडीगार्ड ने लगाए गंभीर आरोप
2025 में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता कृष्णानंद त्रिपाठी पर उनके सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने मारपीट और जातिसूचक गाली देने के आरोप लगाए थे. इस मामले में शिकायत के बाद FIR की कार्रवाई हुई. पुलिस एसोसिएशन की ओर से भी कार्रवाई की मांग की गई थी. हालांकि त्रिपाठी ने आरोपों से साफ इनकार किया. इस मामले में भी आरोप और कार्रवाई को अंतिम निष्कर्ष के तौर पर नहीं, बल्कि शिकायत और पुलिस कार्रवाई के रूप में देखना जरूरी है.
मांडू विधायक तिवारी महतो का वीडियो भी हुआ था वायरल
2026 में मांडू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो से जुड़ा कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो में विधायक ग्रामीणों के साथ गाली-गलौज करते नजर आए थे. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामला खूब गरमाया. हालांकि बाद में मामला शांत हो गया.
बेरमो विधायक अनूप सिंह पर भी लगे आरोप
बेरमो विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह से जुड़ा विवाद भी सामने आ चुका है. एक शिकायतकर्ता ने विधायक और उनके बॉडीगार्ड पर गाली-गलौज और मारपीट के आरोप लगाए थे. मामले को लेकर शिकायत की गई और कथित बातचीत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया. इन मामलों में भी आरोपों की पुष्टि और अंतिम जिम्मेदारी तय करना जांच का विषय है.
DSP पर सिपाही ने लगाया था गाली-गलौज का आरोप
सवाल सिर्फ जनप्रतिनिधियों की भाषा का नहीं है. अगर नेताओं और मंत्रियों के व्यवहार पर सवाल उठते हैं, तो पुलिस और प्रशासन इससे अलग कैसे रह सकते हैं? 2021 में साहिबगंज के जैप-9 में छुट्टी का आवेदन देने पहुंचे एक सिपाही ने तत्कालीन DSP एकमुनियस बाड़ा पर गाली-गलौज करने का आरोप लगाया था. पुलिस मेंस एसोसिएशन ने मामले को लेकर जैप DIG से लिखित शिकायत भी की थी.
बरहेट थाने का वीडियो बना था विवाद का कारण
2020 में बरहेट थाना परिसर का एक वीडियो सामने आया था. इसमें एक युवती के साथ कथित मारपीट और थाना प्रभारी पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगा था. मामला सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई और जांच के निर्देश दिए थे.
रांची के सदर थानेदार पर भी लगा था आरोप
2024 में रांची के तत्कालीन सदर थाना प्रभारी लक्ष्मीकांत पर आदिवासियों के साथ कथित गाली-गलौज और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगा था. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई की और उन्हें थाना प्रभारी के पद से हटा दिया गया था.
जमशेदपुर के टेल्को थाना प्रभारी भी विवाद में आए
जमशेदपुर में टेल्को थाना प्रभारी शैलेंद्र से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था. एक महिला ने उन पर अपशब्द और गाली देने का आरोप लगाया था. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच की और स्पष्टीकरण मांगा था.
ग्रामीणों ने पुलिस जवानों पर भी लगाये आरोप
घाटशिला क्षेत्र के केसरपुर पिकेट में तैनात तीन पुलिसकर्मियों पर भी ग्रामीणों ने गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप लगाए थे. शिकायत के बाद पुलिस स्तर पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था.
सवाल सिर्फ गाली का नहीं, आचरण का है
इन घटनाओं को एक साथ देखें तो तस्वीर साफ होती है कि भाषा और व्यवहार को लेकर विवाद सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं हैं. मंत्री, विधायक, वरिष्ठ अधिकारी, थाना प्रभारी और पुलिस जवान पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं. हालांकि इन सभी मामलों में आरोपों, वायरल ऑडियो-वीडियो और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर करना जरूरी है. किसी वायरल सामग्री को बिना जांच के अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा.
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