- सरकारी खजाने से नहीं जाएगी एक भी पाई, निजी कंपनियां करेंगी निवेश
Ranchi News : झारखंड के शहरों में खुले में कचरा फेंकने की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त होगी. इसके लिए राज्य भर के शहरी निकायों में आधुनिक ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. इन संयंत्रों में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 100 से 150 टन कचरे का वैज्ञानिक निपटान होगा. इस कचरे से सीधे बायोगैस, जैविक खाद और आरडीएफ ईंधन तैयार किया जाएगा. राज्य शहरी विकास एजेंसी (सूडा) ने लैंडफिल पर कचरे का जमाव रोकने और पर्यावरण सुरक्षा के लिए यह योजना बनाई है.
मिश्रित कचरे की होगी ऑन-साइट छंटाई
नई व्यवस्था के लागू होने से नगर निकायों के डंपिंग यार्ड पर कचरे का दबाव घटेगा. संयंत्रों में आने वाले समूचे मिश्रित कचरे की आधुनिक प्रणालियों से वैज्ञानिक छंटाई की जाएगी. सड़ने-गलने वाले जैविक हिस्से से बायोगैस और कंपोस्ट खाद बनेगी. गैर-पुनर्चक्रण योग्य सूखे कचरे को सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए आरडीएफ ईंधन में तब्दील किया जाएगा.
इसके साथ ही प्लास्टिक, कांच और धातुओं को रीसाइक्लिंग के लिए अलग निकाला जाएगा. इस नियंत्रित प्रणाली से हवा में घुलने वाले सूक्ष्म कणों के उत्सर्जन में 99 प्रतिशत से अधिक की कमी आएगी.
100 प्रतिशत राजस्व रख सकेंगी निजी एजेंसियां
संयंत्रों की स्थापना और संचालन का पूरा जिम्मा निजी विशेषज्ञ कंपनियों का होगा. सरकार इन कंपनियों को केवल जमीन, जल आपूर्ति और कचरा उपलब्ध कराएगी. इस कार्य के लिए सरकारी खजाने से कोई सब्सिडी या वित्तीय मदद नहीं दी जाएगी.
इसके बदले में कंपनियों को तैयार बायोगैस, खाद और ईंधन बेचकर मिलने वाला शत-प्रतिशत राजस्व रखने की छूट होगी. इससे नगर निकायों पर कोई वित्तीय बोझ डाले बिना कचरे का स्थायी वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित हो सकेगा.
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