- साइबर अपराध पर झारखंड पुलिस के दावों और आंकड़ों में अंतर
Ranchi News : झारखंड पुलिस भले लाख दावे कर ले कि साइबर अपराध पर लगाम लगाने और आम लोगों को राहत देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन सामने आए आंकड़े पुलिस के इन दावों की अलग तस्वीर पेश कर रही है.
केंद्र स्तर पर वित्तीय और साइबर अपराध को लेकर हुई समीक्षा में झारखंड में मामलों के निपटारे की रफ्तार काफी धीमी पाई गई है. राज्य में साइबर अपराध से जुड़े कुल 2,730 मामलों में महज 351 मामलों का निपटारा हुआ है. यानी मामलों के निपटारे की दर सिर्फ 12.85 प्रतिशत रही. 2379 मामले अब भी लंबित हैं.
दावे और आंकड़ों में अंतर
झारखंड पुलिस की ओर से साइबर अपराध के खिलाफ अभियान और आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी लगातार सामने आती रही है. 1930 हेल्पलाइन के जरिए साइबर ठगी की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था भी है. इसके बावजूद समीक्षा में मामलों के निपटारे की दर महज 12.85 प्रतिशत दर्ज की गई. विभिन्न राज्यों में साइबर अपराध की स्थिति की समीक्षा के दौरान झारखंड के प्रदर्शन का आकलन भी इन्हीं मानकों के आधार पर किया गया.
ठगी की रकम रोकने में Lien प्रतिशत 17.23 फीसदी
वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में ठगी की रकम को बैंक खाते में रोकने की कार्रवाई यानी Lien का झारखंड में औसत प्रतिशत 17.23 फीसदी रहा. वर्ष 2026 की शुरुआत में इसमें कुछ सुधार भी दर्ज किया गया. समीक्षा में CFMC में राज्य के प्रतिनिधियों की तैनाती का भी उल्लेख है. इसके जरिए बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय कर ठगी की रकम को समय रहते रोकने की प्रक्रिया पर नजर रखी जाती है.
1930 हेल्पलाइन का 24 घंटे संचालन
साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों के लिए संचालित 1930 हेल्पलाइन की समीक्षा में पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता और चौबीसों घंटे संचालन की बात सामने आई. साइबर ठगी के मामलों में शिकायत के बाद रकम कई बैंक खातों में तेजी से ट्रांसफर हो सकती है. ऐसे में शुरुआती कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसी वजह से 1930 हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली को भी समीक्षा का हिस्सा बनाया गया.
रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर हॉटस्पॉट
समीक्षा में रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर में म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध स्थानों की संख्या राष्ट्रीय स्तर पर अधिक दर्ज की गई है. इसके अलावा कई जिलों में ATM कैश-आउट हॉटस्पॉट भी सक्रिय पाए गए हैं. इन स्थानों पर साइबर ठगी से हासिल रकम को नकद निकालने की गतिविधियां सामने आई हैं.
मोबाइल और IMEI ब्लॉकिंग में पेंडेंसी
तकनीकी कार्रवाई से जुड़े आंकड़ों में मोबाइल ब्लॉकिंग में प्रगति के बावजूद लंबित मामलों का उल्लेख किया गया है. IMEI ब्लॉकिंग में भी महत्वपूर्ण बैकलॉग दर्ज है. वर्ष 2026 तक कई मामले लंबित बताए गए हैं. समीक्षा में CIAR और IMEI से जुड़े लंबित मामलों को अलग-अलग दर्ज किया गया है.
337 गिरफ्तारियां, समन्वय प्लेटफॉर्म पर 109 मामले
प्रवर्तन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, साइबर अपराध के मामलों में कुल 337 गिरफ्तारियां की गई हैं. वहीं, समन्वय प्लेटफॉर्म पर 109 मामले दर्ज किए गए हैं. ये आंकड़े साइबर अपराध के खिलाफ गिरफ्तारी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की स्थिति को दर्शाते हैं.
नेटग्रिड के इस्तेमाल में भी बड़ी पेंडेंसी
साइबर अपराध की जांच और सूचनाओं के इस्तेमाल से जुड़े नेटग्रिड समाधान की स्थिति भी समीक्षा में सामने आई. 13 मार्च 2026 को राज्य स्तर पर नेटग्रिड समाधान के प्रभावी इस्तेमाल को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई थी.
समीक्षा के मुताबिक, झारखंड में कुल 49 नेटग्रिड यूजर्स हैं, जिनमें से सिर्फ 26 सक्रिय हैं. यानी 23 यूजर्स सक्रिय नहीं हैं. राज्य स्तर पर और गृह मंत्रालय के नेटग्रिड के साथ समन्वय के लिए पर्याप्त वरिष्ठता वाले नोडल अधिकारी की नियुक्ति का भी उल्लेख समीक्षा में किया गया है.
आंकड़ों में साइबर पुलिसिंग की तस्वीर
झारखंड में साइबर अपराध से जुड़े 2,730 मामलों में सिर्फ 351 का निपटारा, 17.23 फीसदी Lien प्रतिशत, IMEI ब्लॉकिंग में बैकलॉग, 337 गिरफ्तारियां, समन्वय प्लेटफॉर्म पर 109 मामले और 49 में से सिर्फ 26 सक्रिय नेटग्रिड यूजर्स का आंकड़ा समीक्षा में दर्ज किया गया है, जो राज्य में साइबर पुलिसिंग की मौजूदा स्थिति की तस्वीर पेश करते हैं.
वहीं, रांची, धनबाद, जामताड़ा व देवघर में म्यूल खातों, संदिग्ध स्थानों की मौजूदगी और कई जिलों में ATM कैश-आउट हॉटस्पॉट की सक्रियता साइबर अपराध की चुनौती को और गंभीर बनाती है. आंकड़ों से साफ है कि कार्रवाई और गिरफ्तारियों के बावजूद मामलों के निपटारे, ठगी की रकम रोकने और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल के मोर्चे पर अभी काफी सुधार की जरूरत है.


