- 10 विशेषज्ञों की टीम संभालेगी बाघों की निगरानी
Palamu News : झारखंड के जंगलों में बाघों की मौजूदगी बढ़ाने और उनके संरक्षण को मजबूत करने के लिए वन विभाग ने नई पहल की है. पलामू टाइगर रिजर्व में विशेष टाइगर सेल बनाया गया है.
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दस विशेषज्ञों की यह टीम राज्यभर में बाघों की आवाजाही पर नजर रखेगी. उनके ठिकाने, गतिविधियों और जंगलों में रहने के अनुकूल माहौल से जुड़ी जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार करेगी. इस व्यवस्था के जरिए बाघों की निगरानी को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की तैयारी है.
टाइगर सेल का मुख्यालय बेतला नेशनल पार्क में होगा. इसमें एआई विशेषज्ञ, जीव वैज्ञानिक, फील्ड विशेषज्ञ, ग्रासलैंड विशेषज्ञ, पर्यटक प्रबंधन विशेषज्ञ, गाइड विशेषज्ञ, रेस्क्यू विशेषज्ञ और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ सहित अलग-अलग क्षेत्रों के जानकार शामिल किए गए हैं. इन विशेषज्ञों को प्रशिक्षण देने और उनकी क्षमता का आकलन करने के बाद सेल का गठन किया गया है.
तीन साल पहले बनी थी योजना, अब मिली जिम्मेदारी
टाइगर फाउंडेशन की वर्ष 2023 में हुई बैठक में टाइगर सेल बनाने का फैसला लिया गया था. इसके बाद पलामू टाइगर रिजर्व से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता के लिए तैयार किया गया. प्रशिक्षण और आकलन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस विशेषज्ञों की टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है. पलामू टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र के उप निदेशक प्रजेशकान्त जेना इस सेल की निगरानी करेंगे.
सात बाघों की आवाजाही दर्ज, लेकिन नहीं पहुंची एक भी बाघिन
झारखंड में बाघों की स्थिति वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. वर्ष 2021 के बाद अब तक पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सात बाघों की आवाजाही दर्ज की गई है. इनमें कुछ बाघ पलामू से निकलकर हजारीबाग, रांची, खूंटी और जमशेदपुर तक पहुंचे हैं. हालांकि, अब तक एक भी बाघिन यहां नहीं पहुंची है. यही वजह है कि पलामू में बाघों की स्थायी आबादी विकसित नहीं हो पा रही है.
मध्य प्रदेश से आएंगे दो बाघिन और एक बाघ
मिली जानकारी के अनुसार, झारखंड में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए टाइगर सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसके तहत मध्य प्रदेश के किसी टाइगर रिजर्व से दो बाघिन और एक बाघ को पलामू लाने की योजना है. इसके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है.
प्रस्तावित योजना के अनुसार तीनों बाघों को पलामू टाइगर रिजर्व के सॉफ्ट रिलीज सेंटर में रखा जाएगा. वहां उन्हें नए वातावरण के अनुकूल बनाया जाएगा और प्रजनन के जरिए बाघों की संख्या बढ़ाने की कोशिश होगी.
इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही विशेषज्ञों की टीम पलामू पहुंचने वाली है. योजना के मुताबिक वर्ष 2026 के अंतिम महीनों तक बाघों को यहां लाने की तैयारी है.
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