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LAGATAR IMPACT :  पलामू में शिक्षा विभाग एक्शन मोड में, अवैध रूप से संचालित स्कूलों पर शिकंजा कसने की तैयारी

  • 8 अप्रैल तक पंजीकरण नहीं तो होगी कार्रवाई

Palamu :  पलामू में अवैध रूप से संचालित स्कूलों पर शिक्षा विभाग शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है. विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कक्षा 1 से 8 तक संचालित सभी गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को अंतिम चेतावनी जारी की है.

 

डीएसई द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, विद्यालय प्रबंधन को आठ अप्रैल तक अनिवार्य रूप से विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण करने का निर्देश दिया गया है. स्कूलों को आवेदन ऑनलाइन जमा करने को कहा गया है.

 

लगातार की खबर पर डीएसई ने लिया संज्ञान

बता दें कि पांकी थाना क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित स्कूल की छात्रा अशरती कुमारी की मौत हो गई थी. इसके बाद 28 मार्च को लगातार डॉट इन ने पांकी में छात्रा की मौत से निजी स्कूलों पर सवाल शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी.

 

इसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और अवैध रूप से संचालित विद्यालयों की पहचान और लिस्टिंग करने का निर्देश दिया. डीएसई ने संबंधित अधिकारियों को जांच प्रक्रिया में तेजी लाने का भी निर्देश दिया है.

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8 अप्रैल तक मान्यता नहीं तो होगी कार्रवाई

जारी निर्देश के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक संचालित सभी गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को 8 अप्रैल तक विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा. निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं करने वाले विद्यालयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें बंद किया जाएगा.

 

विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है. इससे साफ है कि अब बिना मान्यता के स्कूल चलाना मुश्किल होगा.

 

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अभिभावकों में जागरूकता बढ़ी

लगातार डॉट इन में खबर प्रकाशित होने के बाद अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ी है और वे अपने बच्चों के स्कूल की मान्यता और सुविधाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि मीडिया में मुद्दा उठने के बाद अब प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होने लगी है.

 

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पहले भी सामने आ चुके हैं गंभीर मामले

पलामू जिले में निजी विद्यालयों से जुड़ी लापरवाही के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. तरहसी क्षेत्र में एक आवासीय विद्यालय से चार बच्चों के भागने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी.

 

इसके अलावा कई मामलों में बच्चों के बीमार पड़ने, समय पर इलाज नहीं मिलने और अभिभावकों को सूचना देने में देरी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं. इन विद्यालयों में ना ही भवन है और ना ही सुरक्षा व्यवस्था या वाहन है.

 

इन घटनाओं के बावजूद लंबे समय तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से अवैध विद्यालयों का विस्तार होता गया. लेकिन अब ताजा घटना और लगातार डॉट इन की रिपोर्ट के बाद विभाग आगे कितना लगाम कस पाता है यह देखना होगा.

 

 

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