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लाउडस्पीकर विवाद : रिम्स प्रबंधन की बैठक, परिसर में साइलेंट जोन लागू करने का निर्णय

Ranchi :  रिम्स के निदेशक की अध्यक्षता में डीन, चिकित्सा अधीक्षक, प्रशासनिक अधिकारियों और सभी विभागाध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में पुराने आकस्मिक वार्ड के पास स्थित हनुमान मंदिर से जुड़ी घटना और अन्य विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई.

 

निदेशक ने बताया कि मंदिर में पिछले करीब दो वर्षों से लाउडस्पीकर का उपयोग किया जा रहा था, जिसे बंद करने के लिए कई बार मौखिक निर्देश दिए गए थे. तीन दिन पहले भी निर्देश दिए जाने के बावजूद इसका उपयोग जारी रहा. 

 

इसके बाद मरीजों के हित को देखते हुए निदेशक स्वयं मौके पर पहुंचे और पुलिस को भी सूचना दी गई. इसके बाद पुजारी को फटकार लगाते हुए लाउडस्पीकर जब्त कर लिया गया. इस पूरी घटना की वीडियोग्राफी भी कराई गई

 

 

रिम्स प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो को भ्रामक बताया है. कहा कि निदेशक ने पहले मंदिर में श्रद्धापूर्वक नमन किया और सीढ़ियों से ही पुजारी को निर्देश दिया. चिकित्सकों ने भी पुजारी द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने की निंदा की.

 

ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि मंदिर ट्रॉमा सेंटर के काफी पास है, जहां गंभीर मरीजों का इलाज होता है. ऐसे में शोर से मरीजों पर नकारात्मक असर पड़ता है. सभी सदस्यों ने रिम्स परिसर को साइलेंट जोन बनाए जाने पर सहमति जताई.

 

बैठक में यह भी सामने आया कि मंदिर पहले छोटा था, लेकिन पिछले साल रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण कर इसका विस्तार किया गया, जो उच्च न्यायालय के निर्देशों के खिलाफ है. इसके बावजूद धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए रिम्स ने मंदिर को अपने प्रबंधन में लिया है. प्रबंधन ने कहा कि धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने की खबरें बेबुनियाद हैं.

 

बैठक में कई अहम फैसले भी लिए गए. मंदिर का प्रबंधन अब रिम्स प्रशासन के अधीन होगा और पुजारी की नियुक्ति भी प्रशासन करेगा. मंदिर संचालन के लिए सर्वधर्म प्रबंधन समिति का गठन किया गया. परिसर में असामाजिक गतिविधियों पर रोक के लिए कार्रवाई होगी.

 

रिम्स को औपचारिक रूप से साइलेंट जोन घोषित किया जाएगा. अस्पताल परिसर में वाहनों, खासकर एम्बुलेंस के हॉर्न और सायरन के उपयोग पर प्रतिबंध से संबंधित सूचना लगाई जाएगी. बैठक में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए.

 

जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया गया. संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. साथ ही सिकल सेल और थैलेसीमिया मरीजों को बिना डोनर के रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है.

 

अन्य मरीजों के लिए रक्त की कमी को देखते हुए परिजनों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है. ब्लड बैंक द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार ही रक्त दिया जा रहा है. रिम्स प्रशासन ने कहा कि मरीजों की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर इलाज उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे.

 

 

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