Ranchi News : परिसीमन की प्रक्रिया के विरोध में आदिवासी संगठनों ने 30 अगस्त को रांची में महाजुटान कार्यक्रम का आयोजन किया है. इस आयोजन में इसाई समुदाय के लोगों को शामिल होने को लेकर जारी एक पत्र के बाद राजनीति शुरू हो गई है. भाजपा नेताओं ने कहा कि यह एक धार्मिक संगठन द्वारा जारी फतवा है.
रांची कैथोलिक आर्कडायसिस के महाधर्माध्यक्ष वि. आइन्द से 15 अगस्त को जारी एक पत्र को भाजपा नेता सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं. पत्र में इसाई समुदाय के लोगों से कहा गया है कि आदिवासियों के राजनैतिक प्रतिनिधित्व में कमी ना हो, संविधान में दिए गए अधिकार पांचवी अनुसूची, भौगोलिक स्थिति, आदिवासी जनसंख्या घनत्व, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था आदि को परिसीमन का आधार बनाया जाए. यह मांग नहीं है, हमारी जरूरत है.
"भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि झारखंड में अब आर्च बिशप राजनीति रोटी सेंकने और परिसीमन के विरोध में किये जा रहे रैली में फादरों, सिस्टरों और ईसाइयों को सम्मलित होने का अनुरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि फतवा जारी कर रहे हैं. "
पत्र में पांच तरह के खतरों का जिक्र
- एसटी आरक्षित सीटों में कमी.
- आदिवासी बहुल क्षेत्रों का विभाजन.
- पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की राजनीतिक शक्ति का कमजोर होना.
- आदिवासी नेतृत्व का सीमित होना.
- संविधान से मिली सुरक्षा का खत्म होना.

जारी पत्र की प्रति.
इसके साथ ही पत्र में इसाई धर्म की अगुवाई करने वालों विश्वासियों, फादर, ब्रदर और सिस्टर को संबोधित करते हुए कहा गया है कि रविवार (30 अगस्त) को सुबह के अलावा किसी पल्ली में कोई प्रोग्राम ना रखा जाये. सभी अपने घरों से निकलें और अपने अधिकार के लिए जुलूस में हिस्सा लें. यह अनुरोध है, आज्ञा है.
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