- नोवामुंंडी, जगन्नाथपुर प्रखंड एवं काटामाटी क्षेत्र किसान बढ़ा सकेंगे अपनी आय
मीरा सिंह और कांग्रेस नेता मोहित शाहदेव के ठिकानों पर ईडी की रेड नोवामुंडी और काटामाटी क्षेत्र में टीएसएफ का कृषि विभाग अजोला की खेती के माध्यम से पशुधन चारे के एक प्रमुख उप-उत्पाद को बढ़ावा दे रहा है. टीएफएफ का मुख्य उद्देश्य है कि सभी कृषि और पशुपालक किसान इन 30 किसानों के माध्यम से अजोला की खेती और उसके फ़ायदे के बारे में जानकारी प्राप्त करें और भविष्य में सभी किसान इसकी खेती कर के अपने आय को बढ़ा सकें. दूसरा मुख्य उद्देश्य इसकी खेती को बढ़ावा देने का है. साथ ही किसान अजोला की खेती करके कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सही से इसका उपयोग कर सकें और अनेक तरह से अजोला का लाभ प्राप्त करें. अजोला शब्द सुनकर आपके मन में कहीं सवाल उठ रहे होंगे कि आखिर ये अजोला होता क्या है और इसकी खेती करने से कैसे किसानों और पशुपालको के लिए उपयोगी हो सकता है? आइए आपको बताते हैं इसकी खेती और प्रयोग के बारे में. इसे भी पढ़ें : गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-loss-seat-there-has-been-a-clash-between-bjp-and-jmm-since-the-formation-of-jharkhand/">गिरिडीह
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क्या है अजोला?
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, ``अजोला`` समशीतोष्ण जलवायु में पाए जाने वाला एक जलीय फर्न है. ये सेल्विनिएसी प्रजाति का होता है. फर्न पानी पर एक हरे रंग की परत जैसा दिखता है. इस फर्न के निचले भाग में सिम्बोइंट के रूप में ब्लू ग्रीन एल्गी सयानोबैक्टीरिया पाया जाता है, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को परिवर्तित करता है. इसकी नाइट्रोजन को परिवर्तित करने की दर लगभग 25 किलोग्राम प्रति हेक्टर होती है. इसे भी पढ़ें : भाजपा">https://lagatar.in/bjps-operation-santhal-after-sita-now-lobin-hembram-is-on-target/">भाजपाका ऑपरेशन संथाल : सीता के बाद अब लोबिन हेंब्रम हैं निशाने पर ये नम मिट्टी, खाइयों और तालाबों में पाया जा सकता है और यह एक अत्यधिक पौधा है. यदि परिस्थितयां सही हो तो यह 10–15 दिनों में अपना बायोमास दोगुना कर देता है. अजोला पोषण की खान है. इसमें प्रोटीन (25%-35%), कैल्शियम (67 मिलीग्राम/100 ग्राम) और लौह (7.3 मिली ग्राम/ 100 ग्राम) बहुतायत में पाया जाता है. शोधों से पता चला है कि बेहतर घास मानी जानी वाली बर्सियम, लूसर्न और अलसंडा पौधों की तुलना में बेहेतर पोषण प्रदान करती है. इसे भी पढ़ें : हजारीबाग">https://lagatar.in/hazaribagh-lok-sabha-meaning-of-jp-patel-being-a-congressman/">हजारीबाग
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अजोला के फायदे अनेक
(1) चावल की खेती में जैव-उर्वरक के रूप में अजोला : अजोला की खेती धान के खेत में या तो मोनोक्रॉप या इंटरक्रॉप के रूप में की जाती है और मिट्टी में ह्यूमस और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए इसे मिट्टी में मिलाया जाता है.एजोला पर्याप्त दर पर नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है. यह चावल के खेत में हरी खाद सह जैव उर्वरक के रूप में कार्य करता है और मिट्टी की नाइट्रोजन को 50-60 किलोग्राम/हेक्टेयर तक बढ़ाता है. और चावल की फसल की 30-35 किलोग्राम नाइट्रोजन उर्वरक की आवश्यकता को भी कम करता है. इसे भी पढ़ें : रांची">https://lagatar.in/leaders-of-the-state-are-changing-faster-than-the-weather-many-have-camped-in-delhi/">रांची: मौसम से भी तेजी से बदल रहे सूबे के नेता, कई ने दिल्ली में जमाया डेरा (2) पशुधन के लिए पोषक पूरक : अजोला का उपयोग मवेशी, बकरी, सूअर, खरगोश, मुर्गियां, बत्तख और मछली जैसे विभिन्न जानवरों के लिए भोजन के पूरक के रूप में किया जाता है. (3) लवणीय मिट्टी का सुधार : अजोला नमक के प्रति अपेक्षाकृत संवेदनशील है. लगातार दो वर्षों की अवधि के लिए लवणीय वातावरण में खेती करने से नमक की मात्रा कम हो जाती है और अम्लीय मिट्टी की विद्युत चालकता, पीएच भी कम हो जाती है और मिट्टी में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-jewelery-stolen-along-with-rs-1-60-lakh-cash-from-bccl-employees-residence-in-madhuban/">धनबाद
: मधुबन में बीसीसीएल कर्मी के आवास से 1.60 लाख नकद सहित आभूषण की चोरी (4) मिट्टी के भौतिक-रासायनिक गुणों में सुधार : अजोला का उपयोग मिट्टी में कुल नाइट्रोजन, कार्बनिक कार्बन और उपलब्ध फास्फोरस को बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए किया जाता है. (5) बायोरेमेडिएशन : एजोला प्रदूषित पानी से भारी धातुओं, लोहा और तांबे को हटा देता है. कम सांद्रता वाले प्रदूषकों को तालाबों के माध्यम से प्रवाहित करके उपचारित किया जा सकता है और कृषि प्रयोजनों के लिए पुन: उपयोग किया जा सकता है. एजोला प्रदूषकों या सीवेज जल से सीधे तांबा, कैडमियम, निकल, सीसा और पोषक तत्वों जैसे धातुओं को केंद्रित करने की उल्लेखनीय क्षमता प्रदर्शित करता है. इसे भी पढ़ें : रांची">https://lagatar.in/ranchi-municipal-corporation-is-busy-in-re-operation-of-municipal-hospital/">रांची
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नवरात्रि चैत्र मां वन देवी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष बने गंगा सिद्धू
- सर्वसम्मति से चुनी गईं सचिव झरनी दास
alt="" width="934" height="424" /> Noamundi (Sandip Kumar Prasad) : गुवा से मनोहरपुर जाने वाले 4 किलोमीटर दुर मुख्य सड़क पर घाटी स्थित मां वन देवी मंदिर के चैत्र नवरात्रि दुर्गा को लेकर पुजारी नवीदत्त महापात्र की अध्यक्षता में गुवा नगर राम मंदिर के प्रांगण में बैठक का आयोजन किया गया. बैठक के दौरान सर्वसम्मति से चैत्र नवरात्रि मां वनदेवी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष गंगा सिद्धू व सचिव झरनी दास, कोषाध्यक्ष बिमला बोदरा को बनाया गया. वही संरक्षक समाजसेवी साधु चरण सिद्धू बना. चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल को मां शैलपुत्री पूजा पर कलश घटस्थापन किया जाएगा. 16 अप्रैल को अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा के बाद प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-corporation-raids-purana-bazar-60-kg-polythene-seized-2-news-including/">धनबाद
: पुराना बाजार में निगम का छापा, 60 किलो पॉलिथीन जब्त समेत 2 खबरें 17 अप्रैल को नौ कन्याओं का पूजन कर महाभोज का वितरण कार्यक्रम. इस मौके पर भानू कुमार दास, मनोज कुमार प्रसाद, संतोष कुमार बेहरा, विभीषण बोसा, संक्रतिन बोसा,अजय बोदरा, मंजू चम्पिया, महेंद्र सिंह,सोंगा सिद्धू ,राजू ठाकुर,अनिल बिहारी, सोमवारी हेस्सा, सोमनाथ चम्पिया,विजय साहू, सुदेश लोहार, सुशीला चम्पिया, सीता सिद्धू , रजनी सिरका, शत्रुघ्न केशरी व अन्य उपस्थित थे. [wpse_comments_template]
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