Ranchi News : भाजपा प्रदेश कार्यालय के उपाध्याय सभागार में सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने जेएमएम और कांग्रेस पर छात्रों के आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए MMDR एक्ट में हुए संशोधन का विरोध करने का आरोप लगाया.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संसद में 13 अगस्त को MMDR संशोधन बिल पास हुआ है. कांग्रेस और JMM इस मुद्दे पर बेवजह की राजनीति कर रहे हैं. जब संसद में बिल पर चर्चा हो रही थी, तब विपक्षी सांसदों को अपनी बात सदन में रखनी चाहिए थी. कहा कि यह कानून सिर्फ झारखंड के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है. केंद्र सरकार ने राज्यों की रॉयल्टी या DMFT फंड में कोई कटौती नहीं की है.
बीजेपी नेता ने कहा कि राज्य सरकार खनिजों पर अलग-अलग तरह के अतिरिक्त टैक्स लगा रही थी. आयरन ओर पर सेस पहले 100 रुपये से बढ़ाकर 400 और फिर 600 रुपये प्रति टन किया गया. वहीं कोयले पर भी 450 रुपये प्रति टन तक सेस लगाया गया. इससे खनिज कारोबार से जुड़े लोगों की लागत बढ़ रही थी. मरांडी ने कहा कि इसी तरह के मनमाने टैक्स को रोकने के लिए केंद्र ने राज्यों को अतिरिक्त टैक्स लगाने से पहले केंद्र की अनुमति लेने का प्रावधान किया है.
राज्यों को मिलने वाले खनिज राजस्व का आंकड़ा बताते हुए मरांडी ने कहा कि 2014-15 से पहले राज्यों को खनिज और रॉयल्टी से करीब 60.24 फीसदी हिस्सा मिलता था. मोदी सरकार के दौरान यह हिस्सा बढ़कर 88.53 फीसदी हो गया है. उन्होंने कहा कि 2014-15 में राज्यों को 25,206 करोड़ रुपये मिले थे. जबकि 2025-26 में यह राशि बढ़कर 1,45,490 करोड़ रुपये हो गई.
नेता प्रतिपक्ष ने झारखंड की खनन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पिछले छह साल में 35 खदानें शुरू हुईं और प्रीमियम से करीब 87 हजार करोड़ रुपये की आय हुई. इसके विपरीत झारखंड में पिछले छह साल में नीलाम की गई चार खदानों में अब तक किसी में भी उत्पादन शुरू नहीं हुआ है.
बाबूलाल ने आरोप लगाया कि झारखंड में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है. उनका दावा है कि अवैध तरीके से निकाला गया कोयला और आयरन ओर कई फैक्ट्रियों तक पहुंच रहा है. इससे सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है और भ्रष्ट अधिकारियों तथा बिचौलियों को फायदा मिल रहा है.
मरांडी ने JSSC और JPSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि पिछले 22-23 दिनों से युवा धरने और भूख हड़ताल पर बैठे हैं. छात्र भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और नौकरियों की कथित बिक्री की जांच की मांग कर रहे हैं.
बाबूलाल ने आरोप लगाया कि सरकार MMDR एक्ट के मुद्दे को आगे कर छात्रों के आंदोलन से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि JSSC मामले में चेयरमैन को कथित तौर पर 70 करोड़ रुपये दिए जाने की चर्चा हो रही है. सरकार को इस मामले में स्थिति साफ करनी चाहिए और युवाओं के सवालों का जवाब देना चाहिए.
बकाया राशि को लेकर भी बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार को चुनौती दी. उन्होंने कहा कि सरकार जिस 132 करोड़ रुपये के बकाये की बात कर रही है, उसका पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाना चाहिए. सरकार बताए कि यह पैसा किस साल का है और किस काम के लिए था. इसके लिए अखबारों में विज्ञापन देकर पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि जनता के सामने सच्चाई आ सके. प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा भी मौजूद थे.
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