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इलाहाबाद HC के हिजाब वाले फैसले पर ओवैसी ने जताई नाराजगी, बोले-धार्मिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं

Lagatar News :  AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब से जुड़े आदेश पर असहमति जताई. उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यह फैसला इस्लाम और मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं में दखल है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में फैसला आना अभी बाकी है.
 

Lagatar News :  AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर RSS और BJP पर निशाना साधा है. ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर हैदराबाद के दारुस्सलाम में आयोजित ‘जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन’ में उन्होंने संविधान, मनुस्मृति, हिजाब, SIR और हैदराबाद में बढ़ती हत्याओं जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.

 

हिजाब के फैसले पर जताई नाराजगी

ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब से जुड़े आदेश पर असहमति जताई. उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यह फैसला इस्लाम और मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं में दखल है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में फैसला आना अभी बाकी है.

 

हिजाब पहनना इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं

गौरतलब है कि प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की 11वीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा ने याचिका दायर कर स्कूल की यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी. हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज कर दी.

 

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा साबित नहीं हुआ है. कहा कि स्कूल का ड्रेस कोड एक समान,  भेदभावपूर्ण रहित और अनुशासन कायम करने के लिए है. इस नियम (ड्रेस कोड) को लागू करने का अधिकार स्कूल प्रबंधन के पास है.

 

संविधान और मनुस्मृति को लेकर RSS पर हमला

ओवैसी ने आरोप लगाया कि RSS से जुड़े लोगों ने देश के संविधान को स्वीकार नहीं किया था और वे मनुस्मृति को ज्यादा महत्व देते थे. उन्होंने कहा कि भारत ने 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया था. लेकिन कुछ दिनों बाद RSS के मुखपत्र में संविधान की आलोचना की गई थी. ओवैसी का दावा है कि उस समय मनुस्मृति को संविधान की जगह लाने की बात कही गई थी.

 

सावरकर और स्वतंत्रता सेनानियों का किया जिक्र

ओवैसी ने हिंदुत्व विचारक वी.डी. सावरकर का भी जिक्र किया. उन्होंने सावरकर पर अंग्रेजों को पत्र लिखकर रिहाई की मांग करने का आरोप लगाया और उनकी तुलना स्वतंत्रता सेनानी मौलवी फजल-ए-हक खैराबादी से की. ओवैसी ने कहा कि खैराबादी ने अंग्रेजों की कैद में कई मुश्किलें झेलीं, लेकिन उन्होंने अंग्रेजों के सामने झुकने से इनकार किया.

 

मौलवी अलाउद्दीन को लेकर किया दावा

ओवैसी ने कहा कि अंडमान की सेलुलर जेल भेजे गए शुरुआती कैदियों में हैदराबाद के मौलवी अलाउद्दीन शामिल थे. उन्होंने दावा किया कि मौलवी अलाउद्दीन मक्का मस्जिद के इमाम थे और उन्हें अंडमान भेजा गया था.

 

SIR को लेकर लोगों से न घबराने की अपील

दक्षिणी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर भी ओवैसी ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम किसी तरह की विसंगति वाली सूची में आए हैं, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर किसी को नोटिस मिलता है तो वह घबराए नहीं. ओवैसी ने भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी और उसके कार्यकर्ता ऐसे लोगों की मदद करेंगे.

 

हैदराबाद में ‘एंटी-मर्डर स्क्वाड’ बनाने की मांग

ओवैसी ने हैदराबाद में बढ़ती हत्याओं और नशे की समस्या पर भी चिंता जताई. उन्होंने तेलंगाना सरकार से हत्याओं को रोकने और उनकी जांच के लिए एक अलग ‘एंटी-मर्डर स्क्वाड’ बनाने की मांग की. उन्होंने कहा कि हत्या के मामलों की सुनवाई जल्द होनी चाहिए और कोशिश हो कि ऐसे मामलों का फैसला एक साल के भीतर हो जाए. इसके लिए उन्होंने स्पेशल कोर्ट बनाने की भी मांग की. 

 

युवाओं में नशे की लत पर चिंता

AIMIM प्रमुख ने हैदराबाद और तेलंगाना में बढ़ती नशे की समस्या को गंभीर बताया. उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की और कहा कि जो लोग नशे की लत से परेशान हैं, उन्हें मदद लेने में शर्म नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह खुद ऐसे लोगों की नशामुक्ति केंद्र तक पहुंचने में मदद करेंगे.

 

 

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