Ranchi : झारखंड में वर्ष 2017 में शुरू हुई पंचायत सचिव भर्ती प्रक्रिया को करीब 9 साल बीत चुके हैं, लेकिन कई सफल अभ्यर्थियों का नियुक्ति का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है. हजारीबाग की दिव्यांग अभ्यर्थी निशात अब्दुल्लाह भी इन्हीं अभ्यर्थियों में शामिल हैं. परीक्षा के सभी चरण सफलतापूर्वक पास करने और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा होने के बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है.
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निशात अब्दुल्लाह ने बताया कि वर्ष 2017 में पंचायत सचिव की भर्ती निकली थी. उस समय पहली बार महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था. दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने मेन्स परीक्षा पास की और टाइपिंग टेस्ट में 98 प्रतिशत एक्यूरेसी हासिल की. इसके बाद उनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी पूरा हो गया, लेकिन इसके बावजूद उनका परिणाम जारी कर नियुक्ति नहीं दी गई.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी 413 पद खाली
निशात के अनुसार, यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2022 में करीब 2500 अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली, जो पिछले कई वर्षों से सेवा में हैं. उनका दावा है कि अब भी 413 पद खाली हैं और कोर्ट के आदेश के अनुसार इन पदों को भरा जाना है.
निशात के पास मौजूद पंचायती राज विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, खाली पदों में 53 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. उनका कहना है कि योग्य होने के बावजूद उन्हें इन पदों पर नियुक्ति नहीं दी जा रही है.
नियुक्ति की मांग को लेकर निशात अब्दुल्लाह जेएसएससी से लेकर कार्मिक विभाग तक कई बार अधिकारियों के चक्कर लगा चुकी हैं. उनका आरोप है कि हर जगह उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग भेजा गया. अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने मंत्री दीपिका पांडेय से भी अपनी समस्या बताई और सिफारिशी पत्र लेकर आईं, लेकिन इसके बाद भी नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी.
लगातार 9 वर्षों से चल रही इस लड़ाई ने निशात और उनके परिवार को आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान कर दिया है. उन्होंने बताया कि उनके पिता को हार्ट अटैक आ चुका है और अब वे कमाने की स्थिति में नहीं हैं. ससुराल पक्ष से भी उन्हें सहयोग नहीं मिला. उनके अनुसार, फिलहाल उनके पति ही उनका साथ दे रहे हैं, लेकिन उन्हें भी उनके परिवार ने घर से निकाल दिया है.
अपनी स्थिति बताते हुए निशात भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि यह नौकरी उनके लिए सिर्फ एक सरकारी पद नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य का सहारा है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के सभी चरण पास किए हैं, तो आखिर उन्हें उनका अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि 9 साल से वह अपने हक के लिए संघर्ष कर रही हैं. अगर सरकार से उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उनके सामने मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा.
अब सवाल यह है कि 2017 की पंचायत सचिव भर्ती में सफल होने के बावजूद वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहीं निशात अब्दुल्लाह जैसे अभ्यर्थियों की आवाज सरकार और प्रशासन कब सुनेगा और खाली पदों पर नियुक्ति को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे.
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