Ranchi News : बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), मेसरा में शनिवार को 36वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया. समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के कुल 2,984 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए गए.
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इनमें 113 पीएचडी शोधार्थी, 691 स्नातकोत्तर विद्यार्थी, 2,004 स्नातक विद्यार्थी और 176 डिप्लोमा प्राप्तकर्ता शामिल हैं. विभिन्न पाठ्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया.

दीक्षांत समारोह
समारोह में भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत कुमार मोहंती मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस मौके पर बीआईटी मेसरा के चांसलर सी.के. बिरला और कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना सहित संस्थान के शिक्षक, विद्यार्थी, पूर्व छात्र और अभिभावक मौजूद रहे. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और संस्थान की प्रार्थना के साथ हुई.
मुख्य अतिथि डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत तकनीकी बदलाव के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है.
विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए देश को कुशल वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों की जरूरत है. उन्होंने विद्यार्थियों से लगातार सीखते रहने, जिज्ञासु बने रहने और ईमानदारी के साथ अपने ज्ञान का इस्तेमाल देश को आत्मनिर्भर बनाने में करने की अपील की.
बीआईटी मेसरा के चांसलर सी.के. बिरला ने कहा कि डिग्री हासिल करने के साथ विद्यार्थियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. उन्हें अपने ज्ञान और अवसरों का इस्तेमाल समाज के लिए उपयोगी काम करने में करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्र तेजी से बदल रहे हैं.
ऐसे में तकनीकी ज्ञान के साथ नई चीजें सीखने, बदलावों को अपनाने और सही निर्णय लेने की क्षमता भी जरूरी है. उन्होंने विद्यार्थियों को ईमानदारी, भरोसे और अपने मूल्यों को बनाए रखते हुए आगे बढ़ने की सलाह दी.
कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा कि बीआईटी मेसरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, समस्या सुलझाने की क्षमता और समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित करना भी है. वर्ष 1955 में स्थापित यह संस्थान इंजीनियरिंग, विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा, अनुसंधान, उद्यमिता और तकनीकी विकास की अहम भूमिका होगी. उन्होंने विद्यार्थियों से भविष्य में शोधकर्ता, उद्यमी और मार्गदर्शक के रूप में संस्थान से जुड़े रहने की अपील की.
दीक्षांत समारोह के बाद सभी स्नातक विद्यार्थी बीआईटी मेसरा के पूर्व छात्र समुदाय का हिस्सा बन गए. यह नेटवर्क देश-विदेश में उद्योग, शिक्षा, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में काम करने वाले पूर्व छात्रों से जुड़ने का अवसर देता है.
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