Ranchi News : रिम्स प्रशासन जूनियर रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए फेस बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम लागू करने की तैयारी में है, लेकिन इस फैसले ने डॉक्टरों के बीच नाराजगी की चिंगारी सुलगा दी है. जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने डीन को पत्र लिखकर साफ कह दिया है कि जब तक जमीनी हालात नहीं सुधरते, तब तक यह व्यवस्था थोप देना ठीक नहीं होगा.
पत्र में एसोसिएशन ने यह जरूर स्पष्ट किया कि उसे जवाबदेही या पारदर्शी उपस्थिति व्यवस्था से कोई गुरेज नहीं है. सवाल इस बात पर है कि डॉक्टरों की कमी, बढ़ता कार्यभार और अधूरे संसाधनों को नजरअंदाज कर सिर्फ हाजिरी सख्त करने से क्या हासिल होगा. यह भी पूछा गया कि आखिर यह व्यवस्था सिर्फ जेआर, एसआर और असिस्टेंट प्रोफेसरों पर ही क्यों थोपी जा रही है.
काम के घंटे भी विवाद की जड़
एसोसिएशन ने एनएमसी के मानकों का हवाला देते हुए कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों से सामान्यतः हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जाना चाहिए, विशेष हालात में यह सीमा अधिकतम 60 घंटे तक जा सकती है. जेडीए का कहना है कि पहले यह देखा जाए कि रिम्स में यह नियम असल में लागू भी हो रहा है या नहीं, उसके बाद अटेंडेंस को लेकर सख्ती की बात हो.
एसोसिएशन ने रातभर इमरजेंसी में डटे रहने और अगली सुबह राउंड में जुटने वाले डॉक्टरों की मेहनत को महज बायोमेट्रिक इन-आउट के आधार पर आंकने पर भी आपत्ति जताई. साथ ही 23 सितंबर 2024 के स्वास्थ्य विभाग के पत्र का हवाला देते हुए बताया कि 2015 के नियमों में बायोमेट्रिक हाजिरी को वेतन से जोड़ने का कोई जिक्र नहीं है, इसलिए प्रस्ताव की कानूनी स्थिति पहले साफ हो.
जेडीए ने प्रशासन से नीति लागू करने से पहले बातचीत की मांग की है और चेतावनी दी है कि मांगें अनसुनी रहीं तो संगठन आगे लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ता अपनाने पर विचार करेगा.
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