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RRDA की अपील हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए स्वीकृत, एकल पीठ के आदेश पर रोक

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (आरआरडीए) की ओर से दायर अपील पर बुधवार को सुनवाई की. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आरआरडीए की अपील सुनवाई के लिए स्वीकृत कर ली. साथ ही एकल पीठ का आदेश पर रोक लगा दी.
 
  • याचिकाकर्ताओं की अवैध संरचना को तोड़ने पर भी रोक लगाई गई

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (आरआरडीए) की ओर से दायर अपील पर बुधवार को सुनवाई की. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आरआरडीए की अपील सुनवाई के लिए स्वीकृत कर ली. साथ ही एकल पीठ का आदेश पर रोक लगा दी.

 

कोर्ट ने मामले में पारित अंतरिम आदेश जारी रखते हुए अगली सुनवाई तक संबंधित परिसर की स्थिति यथावत रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओ की अवैध संरचना को तोड़ने पर भी रोक लगाई है.

 

 

 

मामले की अगली सुनवाई जून में 

दरअसल, आरआरडीए ने झारखंड पंचायत राज अधिनियम द्वारा शासित क्षेत्रों में भवन निर्माण पर आरआरडीए का नियंत्रण नहीं रखने से संबंधित हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश को हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दी है. मामले की अगली सुनवाई जून माह को होगी.

 

मामले में सरकार की ओर से आरआरडीए की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा. उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि एकल पीठ का आदेश गलत है, इसे निरस्त किया जाए. वहीं प्रतिवादी लवलीन कुमार और मीनू त्रिवेदी एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता भास्कर त्रिवेदी ने पक्ष रखा. 

 

बता दें कि हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आदेश दिया था कि आरआरडीए को झारखंड पंचायत राज अधिनियम द्वारा शासित क्षेत्रों में भवन निर्माण पर नियंत्रण रखने का अधिकार नहीं है.  साथ ही याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों के विरुद्ध जारी विध्वंस और सीलिंग आदेशों को रद्द कर दिया था. जिसे आरआरडीए ने अपील दायर कर चुनौती दी है.

 

एकल पीठ ने पाया था कि दोनों अधिनियम सीधे तौर पर परस्पर विरोधी हैं और निष्कर्ष निकाला कि जहां ऐसी असंगति मौजूद है, वहां पंचायत राज व्यवस्था ही प्रभावी होगी, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण अधिनियम के संबंधित प्रावधान उस असंगति की सीमा तक अप्रभावी हो जाएंगे.

 

एकल पीठ ने सीलबंद ढांचों को खोलने का निर्देश दिया था और स्पष्ट किया था कि पंचायत-नियंत्रित क्षेत्रों में निर्माण कार्य की निगरानी केवल पंचायत राज अधिनियम और इसके तहत अधिकृत अधिकारियों द्वारा ही की जानी चाहिए.

 


विवादित आदेश से प्राधिकरण की वैधानिक शक्तियां हो रही है प्रभावित 

पिछली सुनवाई में आरआरडीए की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में दलील दी थी कि विवादित आदेश से प्राधिकरण की वैधानिक शक्तियां प्रभावित हो रही हैं और यह आदेश वस्तुतः आरआरडीए को निष्प्रभावी कर देता है.

 

सुनवाई के दौरान बताया गया था कि संबंधित परिसर को वर्ष 2021 में सील किया गया था. अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने अपीलकर्ताओं को शेष प्रतिवादियों को नोटिस की सेवा करने का निर्देश था.

 

 

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