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टाटा स्टील को हाईकोर्ट से झटका, MADA के मार्केट फीस नोटिस के खिलाफ रिट में दखल से इनकार

Ranchi News : मामले में टाटा स्टील ने मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MADA), धनबाद द्वारा 31 मार्च 2017 को मार्केट फीस नियमावली, 2010 के नियम 26 के तहत नोटिसों को चुनौती दी थी. कंपनी का तर्क था कि उसकी एक कोयला खदान, जो 32 गांवों में फैली है, नियमों के तहत जारी अधिसूचना से covered है, जबकि धनबाद नगर निगम क्षेत्र में स्थित दो प्रोसेसिंग प्लांट्स पर मार्केट फीस लागू नहीं हो सकती.
 
सिंबोलिक फोटो

Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने मार्केट फीस से जुड़े शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली टाटा स्टील लिमिटेड की याचिका में दखल से इनकार किया है. चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केवल शो-कॉज नोटिस जारी होने के आधार पर रिट याचिका दायर कर उसे रोका नहीं जा सकता.

 

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मामले में टाटा स्टील ने मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MADA), धनबाद द्वारा 31 मार्च 2017 को मार्केट फीस नियमावली, 2010 के नियम 26 के तहत नोटिसों को चुनौती दी थी. कंपनी का तर्क था कि उसकी एक कोयला खदान, जो 32 गांवों में फैली है, नियमों के तहत जारी अधिसूचना से covered है, जबकि धनबाद नगर निगम क्षेत्र में स्थित दो प्रोसेसिंग प्लांट्स पर मार्केट फीस लागू नहीं हो सकती.

 

हाईकोर्ट ने कहा कि टाटा स्टील के तर्क केवल नोटिस के एक हिस्से से संबंधित हैं और इनमें तथ्यात्मक जांच भी शामिल है. इसलिए प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही इसे रोकना उचित नहीं होगा.

 

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टाटा स्टील शो-कॉज नोटिस का जवाब देते समय अपने सभी वैध बचाव—जिसमें अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) का दावा भी शामिल है—उठा सकती है. अथॉरिटी को इन आपत्तियों पर कानून के अनुसार और अपने विवेक से निर्णय लेना होगा.
कोर्ट ने कहा कि शो-कॉज नोटिस के खिलाफ सीधे रिट याचिका दायर करना प्रोत्साहित नहीं किया जाता. जब तक नोटिस पूरी तरह अधिकारहीनता के आधार पर शून्य न हो, पक्षकार को पहले अथॉरिटी के सामने अपनी आपत्तियां रखनी चाहिए.

 

टाटा स्टील ने आरोप लगाया था कि नोटिस जारी करते समय अथॉरिटी ने पहले ही यह निष्कर्ष निकाल लिया था कि कंपनी मार्केट फीस देने के लिए बाध्य है. कंपनी ने कहा कि यह “closed mind” यानी पूर्वनिर्णित मानसिकता का संकेत है. लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि नोटिस में कहा गया कि कंपनी फीस देने की हकदार है, यह केवल प्राथमिक राय (prima facie opinion) है. नोटिस के साथ ही कंपनी को सुनवाई और जवाब देने का अवसर भी दिया गया है.

 

हाईकोर्ट ने टाटा स्टील को शो-कॉज नोटिस का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है, बशर्ते जवाब पहले से दाखिल न हो चुका हो. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस चरण में मामले के गूढ़ पहलुओं पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है और दोनों पक्षों के सभी तर्क खुले रहेंगे. कोर्ट ने टाटा स्टील की याचिका निषपादित कर दी.

 

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