Simdega News : नौकरी दिलाने के नाम पर सिक्योरिटी मनी वसूलकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े रैकेट का सिमडेगा पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, आरोपी एक एनजीओ के जरिए मल्टी लेवल स्कीम चलाकर लोगों को नौकरी और स्टाइपेंड का लालच देते थे.
इसे भी पढ़ें...
प्रारंभिक जांच में करीब 5 से 6 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है. सिमडेगा के एसपी श्रीकांत एस. खोटरे के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच के लिए एसडीपीओ के संयुक्त नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई थी.
मामला बानो और कुरडेग थाना क्षेत्र से जुड़ा है. ग्रामीणों ने “VSK फाउंडेशन” नामक एनजीओ के खिलाफ नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने और ठगी करने की शिकायत की थी. शिकायत के आधार पर बानो थाना में मामला दर्ज और कुरडेग थाना में दर्ज कर जांच शुरू की गई.
एसआईटी ने तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों मामलों में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर ठगी से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं.
पुलिस की जांच में सामने आया कि VSK फाउंडेशन का संचालन प्राथमिकी अभियुक्त ओम प्रकाश कर रहा था. संस्था के तहत “नारी पैड सेवा” और “बाल जननी शिक्षा अभियान” जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे थे. ओम प्रकाश खुद संस्था में नेशनल हेड के रूप में काम करता था. उसके नीचे स्टेट हेड, डिस्ट्रिक्ट हेड, ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर और सेंटर इंचार्ज के पद बनाए गए थे.
इन पदों पर नियुक्ति के नाम पर लोगों से भारी रकम सिक्योरिटी मनी के तौर पर ली जाती थी. पुलिस के अनुसार, स्टेट हेड के लिए 3 लाख, डिस्ट्रिक्ट हेड के लिए 1.50 लाख, ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर के लिए 60 हजार और सेंटर इंचार्ज के लिए 40 हजार रुपये लिए जाते थे. वहीं, बाल जननी शिक्षा अभियान में एनटीटी के लिए 40 हजार और पीटीटी के लिए 60 हजार रुपये वसूले जाते थे.
आरोप है कि लोगों को नौकरी के साथ स्टाइपेंड और सैलरी देने का झांसा भी दिया जाता था. संस्था से जुड़े लोगों को अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था. इसके लिए व्हाट्सऐप पर आकर्षक पोस्टर और पंपलेट भेजे जाते थे और दोगुना इंसेंटिव और कैश प्राइज का लालच दिया जाता था.
जांच में पुलिस को प्रथम दृष्टया करीब 5-6 करोड़ रुपये की ठगी के साक्ष्य मिले हैं. पुलिस के मुताबिक, संस्था के नाम पर लोगों से हासिल रकम का इस्तेमाल ओम प्रकाश अपने निजी आर्थिक लाभ और प्रॉपर्टी खरीदने में कर रहा था. पीड़ितों की रकम वापस दिलाने के उद्देश्य से आरोपियों की संपत्तियों को अटैच करने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.
जांच के दौरान VSK फाउंडेशन के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन के तथ्य भी सामने आए हैं. पुलिस अब इस पूरे आर्थिक नेटवर्क और रकम के लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है.
गिरफ्तार आरोपियों में अशोक साय (43), ओम प्रकाश (44), एनिस केरकेट्टा (42), सरोज केरकेट्टा (44), गोरैती केरकेट्टा (39) और कुन्दन शर्मा (46) शामिल हैं. पुलिस के अनुसार अशोक साय का पूर्व आपराधिक इतिहास भी रहा है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

