Ranchi News : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) के नवनिर्मित मुख्य द्वार पर वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय का नाम लिखे जाने के बाद उसे मिटाने का मामला गरमा गया है. गुरुवार, 5 नवंबर को छात्र संगठनों ने मुख्य द्वार के ऊपर वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय का नाम लिखवाया था.
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हालांकि, उसी रात अज्ञात लोगों ने इसे मिटा दिया. शुक्रवार को इसकी जानकारी मिलने के बाद छात्रों में आक्रोश फैल गया. छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर और सोशल मीडिया पर घटना की निंदा करते हुए विरोध जताया. इसके बाद छात्रों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया.
सड़क जाम की सूचना पर पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. पुलिस ने छात्रों को समझाकर जाम हटाने की कोशिश की, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे. छात्रों का कहना है कि झारखंड के क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी वीर बुधु भगत के नाम को मिटाने वालों की पहचान की जाए. उनके खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज हो और दोषियों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाए.
कुलपति बोले- विश्वविद्यालय ने नहीं लिखवाया था नाम
मामले पर DSPMU के कुलपति राजीव मनोहर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से गेट पर नया नाम नहीं लिखवाया गया था. सरकार की ओर से नवनिर्मित मुख्य द्वार अभी तक विश्वविद्यालय को औपचारिक रूप से हस्तांतरित नहीं किया गया है.
छात्रों और छात्र संगठनों ने स्वयं गेट पर नाम लिखवाया था. फिलहाल विश्वविद्यालय में दीपावली की छुट्टियां चल रही हैं. विश्वविद्यालय खुलने के बाद इस मामले पर काम शुरू किया जाएगा.
दरअसल, वर्ष 2017 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम के तहत रांची कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा देते हुए इसका नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रखा था. इसके बाद से ही विभिन्न आदिवासी संगठनों और छात्र संघों की ओर से विश्वविद्यालय का नाम स्वतंत्रता सेनानी वीर बुधु भगत के नाम पर रखने की मांग की जा रही थी.
लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर 8 मई 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी. हालांकि, कैबिनेट की मंजूरी के बावजूद अब तक विश्वविद्यालय का नाम आधिकारिक रूप से परिवर्तित नहीं हुआ था.
विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार का निर्माण पिछले दो से तीन वर्षों से कराया जा रहा है. इस पर करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं. निर्माण कार्य के दौरान जब गेट का आधा ढांचा तैयार हुआ, तब छात्र संगठनों ने उस पर वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय का नाम लिखवा दिया था. लेकिन नाम मिटाए जाने की घटना ने अब विश्वविद्यालय में नया विवाद खड़ा कर दिया है. छात्र संगठनों ने दोषियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है.
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