Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान सीआईडी को कई तथ्य मिले हैं जांच रिपोर्ट के मुताबिक JPSC की परीक्षाओं के संचालन का काम TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL को वर्ष 2025 में दिया गया था. खास बात यह है कि एजेंसी को काम देने के लिए टेंडर नहीं किया गया था, बल्कि Nomination के आधार पर कार्यादेश जारी किया गया था. जांच में यह भी सामने आया कि इसी कंपनी को पहले JSSC ने अनियमितता, लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी के आरोपों के बाद तीन साल के लिए अपनी रोजगार प्रक्रिया से प्रतिबंधित किया था.
इसे भी पढ़ें....
सीआईडी की जांच में यह भी पता चला है कि TDPL को परीक्षा संचालन का काम End to End Basis पर दिया गया था. यानी परीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत से लेकर अंतिम चरण तक की जिम्मेदारी एजेंसी के पास थी. जांच टीम ने माना कि इस व्यवस्था में एजेंसी के काम पर प्रभावी Check and Balance नहीं था, जो परीक्षा जैसी अति गोपनीय और संवेदनशील प्रक्रिया के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है.
जांच के दौरान TDPL के रांची स्थित आवासीय परिसर से चार कंप्यूटर सेट बरामद किए गए. इनमें से एक कंप्यूटर में Forest Range Officer यानी FRO Mains 2026 परीक्षा के परीक्षार्थियों की लिखित उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं. मौके पर मौजूद कंपनी के कर्मी प्रदीप कुमार सिंह ने जांच टीम को बताया कि यह डाटा कंपनी के कर्मियों मो उस्मान और मो अवध की ओर से भेजा गया था. सीआईडी ने अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाया कि परीक्षा से संबंधित गोपनीय दस्तावेज JPSC कार्यालय से बाहर TDPL के आवासीय परिसर में किस उद्देश्य से रखे गए थे.
WhatsApp पर भेजी गई Answer Key
जांच रिपोर्ट में JPSC की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में हुई झारखंड सिविल सेवा पीटी परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले 26 मई 2026 को Answer Key WhatsApp के जरिए TDPL के कर्मी मो. उस्मान को भेजी गई थी. जांच के दौरान इसको लेकर पूछताछ की गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है.
सीआईडी ने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि परीक्षा से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों को निर्धारित माध्यम के बजाय WhatsApp जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भेजे जाने की वजह की जांच जरूरी है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि श्वेता कुमारी गुप्ता का JPSC से स्थानांतरण हो चुका था, इसके बावजूद वह परीक्षा नियंत्रक का काम कर रही थीं. इस काम में JPSC के कर्मी मनोज तिर्की और सोनू कुमार द्वारा सहयोग किए जाने की सूचना भी जांच में मिलने की बात कही गई है.
TDPL से जुड़ा था अभय कुमार तिवारी
जांच के दौरान अभय कुमार तिवारी का नाम भी सामने आया. रिपोर्ट के अनुसार TDPL की ओर से जारी एक कार्ड में अभय कुमार तिवारी को कंपनी का Marketing Manager बताया गया था. जांच टीम को TDPL के लालपुर स्थित आवासीय परिसर से भी उक्त कार्ड की प्रति मिली. कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह और तकनीकी कर्मी मो. उस्मान से पूछताछ में बताया गया कि रांची आने के शुरुआती दौर में अभय कुमार तिवारी ने कंपनी के कर्मचारियों को सहयोग किया था और उनके रहने का इंतजाम भी कराया था.
जांच में यह भी सामने आया कि अभय कुमार तिवारी JSSC और JPSC की कई परीक्षाओं में परीक्षार्थी रहे और कई परीक्षाओं में सफल हुए. वर्तमान में उनके प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर गोड्डा के पोड़ैयाहाट में कार्यरत होने की बात रिपोर्ट में दर्ज है. सीआईडी ने उनकी भूमिका को लेकर विस्तृत पूछताछ और अनुसंधान की आवश्यकता जताई है.
एजेंसी पर पहले भी लगा था प्रतिबंध
जांच रिपोर्ट के मुताबिक TDPL को इससे पहले JSSC में परीक्षा संचालन का काम मिला था. हालांकि अनियमितता, लापरवाही और उत्तरदायित्वहीनता के आरोपों के बाद JSSC ने 20 मई 2025 के आदेश से कंपनी का कार्यादेश रद्द कर दिया था और अगले तीन वर्षों तक उसे रोजगार प्रक्रिया में शामिल होने से रोक दिया था. इसके बावजूद 2025 में JPSC जैसी संवेदनशील संस्था में परीक्षा संचालन का काम इसी एजेंसी को दिए जाने पर सीआईडी ने सवाल उठाए हैं.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि Open Source से मिली जानकारी के अनुसार TDPL के खिलाफ उत्तर प्रदेश में भी गंभीर आरोप सामने आए थे और वर्ष 2021 में STF द्वारा कंपनी के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह की गिरफ्तारी की सूचना उपलब्ध थी. इसके बावजूद JPSC स्तर से कंपनी की पृष्ठभूमि की पर्याप्त जांच नहीं किए जाने की बात जांच रिपोर्ट में कही गई है.
सौरव सुमन की OMR कॉपी ने खड़े किए सवाल
जांच रिपोर्ट में JPSC सिविल सेवा पीटी के परीक्षार्थी सौरव सुमन का मामला भी दर्ज है. सोशल मीडिया और न्यूज पोर्टल पर उनकी OMR शीट की कार्बन कॉपी वायरल होने का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक वायरल कॉपी में कम प्रश्न हल किए जाने के बावजूद उनके परीक्षा में सफल होने का दावा किया गया था. सीआईडी ने इस पूरे मामले की सत्यता की गहन जांच की जरूरत बताई है.
कई लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई
सीआईडी की जांच रिपोर्ट में TDPL के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह, कंपनी के कर्मी मो. उस्मान और मो. अवध, JPSC की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, JPSC कर्मी मनोज तिर्की, सोनू कुमार और अभय कुमार तिवारी समेत अज्ञात कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की आवश्यकता बताई गई. रिपोर्ट में इन लोगों के बीच मिलीभगत और साठगांठ की आशंका जताते हुए गोपनीय दस्तावेज बाहर भेजने, कूटरचना, आपराधिक न्यास भंग और जालसाजी जैसे आरोपों की दिशा में अनुसंधान की बात कही गई.


