- तत्कालीन विधायक बिरंची नारायण ने अंबुजा ग्रुप को पांच एकड़ जमीन देने के लिए दबाव डाला था.
Ranchi News: IAS अधिकारी राजेश्वरी बी के पति सूरज ने जमीन दलाल शैलेश कुमार सिंह का परिचय विमल अग्रवाल से कराया था. इसके बाद ही राजबीर कंस्ट्रक्शन के निदेशक पुनित अग्रवाल व अन्य ने बोकारो का दौरा किया और तेतुलिया मौजा से संबंधित जमीन का दस्तावेज शैलेश सिंह से लिया. तत्कालीन विधायक बिरंची नारायण ने अंबुजा ग्रुप को पांच एकड़ जमीन देने के लिए दबाव डाला था. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा तेतुलिया वनभूमि घोटाले की जांच के दौरान इस बात की जानकारी मिली है.
पुनित अग्रवाल और विमल अग्रवाल दोनों भाई हैं. राजबीर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड में दोनों भाई निदेशक हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने तेतुलिया वन भूमि घोटाले की जांच के दौरान पुनित अग्रवाल को पूछताछ के लिए बुलाया था. PMLA की धारा 50 के तहत दिये गये अपने बयान में पुनित अग्रवाल ने बताया है कि IAS अधिकारी राजेश्वरी बी के पति सूरज ने शैलेश सिंह का परिचय उसके भाई से कराया था.
पुनित अग्रवाल ने अपने बयान में कहा है कि IAS अधिकारी राजेश्वरी बी के पति सूरज ने वर्ष 2021 में शैलेश सिंह का परिचय उसके भाई विमल अग्रवाल से कराया था. उस वक्त राजेश्वरी बी, दुमका में उपायुक्त के पद पर पदस्थापित थीं. इसके बाद वे लोग जनवरी 2021 के अंतिम सप्ताह में बोकारो गये. शैलेश सिंह से मुलाकात की. तेतुलिया मौजा स्थित जमीन को देखा. साथ ही शैलेश सिंह से, पावर ऑफ ऑटर्नी, कोर्ट के आदेश और जमीन के दस्तावेज लिये.
शैलेश सिंह ने इसमें से 10 एकड़ जमीन डेवलप कराने की बात की. इसमें 55:45 के हिस्सेदारी की मांग की. यानी डेवलप किये गये एरिया में 55 प्रतिशत राजबीर कंस्ट्रक्शन को और 45 प्रतिशत शैलेश कुमार सिंह को मिलेगा. बातचीत के बाद हिस्सेदारी के इस फॉर्मूले में बदलाव हुआ और जमीन के डेवलप करने पर सहमति बनी. नये फॉर्मूले के तहत 60 प्रतिशत की हिस्सेदारी राजबीर कंस्ट्रक्शन और 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी शैलेश सिंह के लिए तय की गयी.
इसके बाद राजबीर कंस्ट्रक्शन ने शैलेश के बेटे के नाम पर बनी मेसर्स उमायुष मल्टिकॉम प्राइवेट लिमिटेड के खाते में भुगतान करना शुरू किया. राजबीर कंस्ट्रक्शन ने 8 फरवरी 2021 को उमायुष मल्टिकॉम को पहली बार 1.80 करोड़ रुपये दिया. 10 फऱवरी 2021 को 1.20 करोड़ और तीसरी बार 4 मार्च 2021 को 30.00 लाख रुपये का भुगतान किया. चौथी बार 26 मार्च 2021 को उमायुष मल्टिकॉम के 10.00 लाख रुपये का भुगतान किया गया.
इस तरह राजबीर कंस्ट्रक्शन ने उमायुष मल्टिकॉम को दो महीने में कुल 3.40 करोड़ रुपये का भुगतान किया. पुनित अग्रवाल ने ईडी को दिये बयान में यह भी कहा कि शैलेश सिंह ने यह भी कहा था कि अंबुजा ग्रुप ने भी डेवलप करने में दिलचस्पी दिखायी थी. तत्कालीन विधायक बिरंची नारायण ने पांच एकड़ जमीन आवंटित करने के लिए दबाव डाला था.
पुनित अग्रवाल ने ईडी को दिये बयान में यह स्वीकार किया है कि उमायुष मल्टिकॉम को पैसा देते वक्त उसके साथ किसी तरह का एकरारनामा नहीं किया गया था. लेकिन कंपनी के ऑडिट के दौरान ऑडिटर के दबाव की वजह से राजबीर कंस्ट्रक्शन और उमायुष मल्टिकॉम के साथ जमीन के डेवलपमेंट के मामले में MOU तैयार किया गया. इस MOU पर उमायुष मल्टीकॉम की तरफ से ललन सिंह ने हस्ताक्षर किया था.
ईडी ने जांच में पाया कि वर्ष 2021-22 में ललन सिंह को MOU पर हस्ताक्षर करने के लिए राजबीर कंस्ट्रक्शन के रांची स्थित कार्यालय में लाया गया था. शैलेश सिंह ने अपने बेटे की कंपनी में ललन सिंह को भी निदेशक बनाया था. ललन सिंह वास्तव में शैलेश सिंह का नौकर था. वह शैलेश सिंह के यहां खाना पकाने और कपड़ा वगैरह धोने का काम करता था. इसके लिए उसे 10 हजार रूपये प्रति माह मिलता था. कंपनी में निदेशक बनाये जाने और इससे संबंधित दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के बाद उसे हर महीने 15 हजार रुपये दिया जाता था.
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