हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में महाधिवक्ता राजीव रंजन, अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद एवं अधिवक्ता शहबाज अख्तर ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने वर्ष 2009 के दौरान बुंडू में सब डिविजन सिविल कोर्ट बनाने के संबंध में हाईकोर्ट को जानकारी दी थी.
लेकिन करीब 16 साल बाद बुंडू की परिस्थितियों बदल गई है. राजधानी रांची से बुंडू की पहुंच भी बेहतर हुई है. ऐसे में अब नई प्लानिंग की जानी जरूरी है. जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस संबंध में जो बात कहनी है, उसे शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट को अवगत कराए. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 मई निर्धारित की है.
दरअसल, पिछली सुनवाई में अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने कोर्ट को बताया था कि जुडिशियल कमिश्नर, रांची की ओर से बुंडू में सब डिविजन सिविल कोर्ट बनाने के लिए से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराने से इससे संबंधित बैठक के बेनतीजा रही थी.
उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया था कि बुंडू में सब डिविजनल सिविल कोर्ट बनाने के संबंध में हाईकोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव ने एक कमेटी बनाई थी. कमेटी ने पाया था कि इसके आधारभूत संरचना के संबंध में जो प्लानिंग की गई है, वह करीब 16- 17 साल पुराना है. इसमें बदलाव करना और अपडेट करना जरूरी है.
इस संबंध में लॉ डिपार्टमेंट से राय लेना आवश्यक समझा गया. लॉ डिपार्टमेंट से अपडेटेड आधारभूत संरचना निर्माण पर जानकारी मांगी गई. लॉ डिपार्टमेंट की ओर से इस संबंध में हाईकोर्ट के रजिस्टार जनरल से जानकारी मांगी गई कि क्या-क्या नई चीज की आवश्यकता होगी और कैसे बेहतर संरचना बनेगी.
हाईकोर्ट रजिस्टार जनरल की ओर से इन विषयों पर जुडिशियल कमिश्नर रांची से जानकारी मांगी गई थी. अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने कोर्ट को यह भी बताया था कि जुडिशियल कमिश्नर रांची से इस संबंध में कोई जानकारी अभी प्राप्त नहीं हुई है, जिससे इस संबंध हुई बैठक बेनतीजा रही है.
इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले में मुख्य सचिव, रांची डीसी, हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, लॉ सेक्रेट्री, रांची जुडिशियल कमिश्नर सहित संबंधित अधिकारी को आज यानी 9 अप्रैल को उपस्थित रहने को कहा था.
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