Ranchi: जेपीएससी परीक्षा घोटाले में गिरफ्तार कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेन्द्र कुमार पासवान राज्य के आला अफसरों का चहेता रहा है. उसके पिता पूर्व चीफ सेक्रेटरी पीपी शर्मा के घर कुक थे. उन्होंने ही उसे कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किया था. कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति के बाद धर्मेंद्र ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आला अफसरों का चहेता बनता चला गया.
धर्मेंद्र तेज-तर्रार माने जाने वाले पूर्व मुख्य सचिवों आरएस शर्मा, राजीव गौबा, राजबाला वर्मा, सुखदेव सिंह के कार्यकाल में आवासीय कार्यालय में काम करता रहा. हां कुछ अफसरों के कार्यकाल में उसे वैल्यू नहीं मिला. लेकिन इस दौरान भी उसका नेटवर्क बढ़ता गया. उसके पास असीमित सूचनाएं होती थीं. जिसका इस्तेमाल वह नीचे के अफसरों पर करता था. धौंस व पकड़ दिखाकर उसने अकूत संपत्ति अर्जित की. अफसर बताते हैं, कई बार उसका लहजा चीफ सेक्रेटरी से भी ऊपर का होता था.
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बताया जाता है कि वह अफसरों की हर प्रकार की सेवा में भी माहिर है. धर्मेन्द्र के एक साधारण कंप्यूटर ऑपरेटर से जेपीएससी में नियुक्ति का माफिया बनने की कहानी झारखंड के सरकारी सिस्टम में भीतर तक पैठ बना चुके एक संगठित नेटवर्क की बानगी है. सभी विभागों में अधिकारी चाहे कोई भी हो, चलती कंप्यूटर ऑपरेटरों की ही रहती है. हर काम में इनका हस्तक्षेप होता है. ये कई बार आदेश में भी हेरफेर करने से बाज नहीं आते.
धर्मेन्द्र की जालसाजी ने इस प्रकरण पर भी सोचने पर मजबूर किया है कि सरकारी सिस्टम में पैठ बना चुके इस नेटवर्क को कैसे ध्वस्त किया जाए, ताकि कामकाज पारदर्शी तरीके से हो सके.
सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि सचिवालय में वर्षों तक रहने के दौरान धर्मेंद्र ने किन अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनाए. उसकी नियुक्ति से लेकर अलग-अलग अधिकारियों के कार्यकाल में उसके बने रहने और बाद में जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते के कार्यालय तक पहुंचने की पूरी कड़ी को जोड़ा जा रहा है.
जांच का सवाल यह भी है कि एक अनुबंधकर्मी आखिर किस तरह लगातार महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंच बनाए रखने में सफल रहा. क्या उसे केवल तकनीकी काम तक सीमित जिम्मेदारी मिली थी या समय के साथ उसने प्रशासनिक और परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं में भी प्रभाव बना लिया था. इन पहलुओं की पड़ताल की जा रही है.
धर्मेंद्र पर अपने पद और सिस्टम तक पहुंच का इस्तेमाल कर चहेतों को लाभ पहुंचाने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं. सीआईडी उसके संपर्कों, पुराने कामकाज और उन लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जिनसे वह लगातार संपर्क में रहा.
जांच एजेंसी यह भी पता कर रही है कि जेपीएससी परीक्षा से जुड़ी कथित सौदेबाजी अचानक हुई या इसके पीछे पहले से तैयार कोई नेटवर्क था. यदि परीक्षा एजेंसी को काम दिलाने के लिए कमीशन की मांग की गई थी तो इसके पीछे किस स्तर तक संपर्क था और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी, यह जांच का अहम हिस्सा है.
इस पूरे मामले में अब तीन कड़ियां विशेष रूप से जांच के केंद्र में हैं. पहला सचिवालय में धर्मेंद्र की वर्षों पुरानी पकड़, जेपीएससी परीक्षा का काम दिलाने के लिए टीडीपीएल से कथित सौदेबाजी और ब्लैक लिस्टेड कंपनी को काम दिलाने में एक बड़े अधिकारी की कथित पैरवी. इन तीनों कड़ियों के आपस में जुड़ने से जांच का दायरा परीक्षा में अनियमितता से बढ़कर पूरे सिस्टम की भूमिका तक पहुंच गया है.
सीआईडी के लिए यह जांच का विषय है कि धर्मेंद्र ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल केवल परीक्षा एजेंसी से सौदेबाजी तक किया या उसके पीछे सरकारी तंत्र में वर्षों से विकसित कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था. जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम और भूमिकाएं सामने आने की संभावना है.
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