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पत्नी को वैसा ही स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग मिलना चाहिए, जैसा शादी के समय था : हाईकोर्ट

  • 30 लाख गुजारा भत्ता देकर पति को हाईकोर्ट से मिला तलाक

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद पर फैसला सुनाते हुए पति को तलाक की अनुमति दे दी. साथ ही कोर्ट ने 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देना अनिवार्य कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी की कोई स्वतंत्र आय नहीं है, इसलिए उसका भविष्य सुरक्षित करना जरूरी है. 

 

अदालत ने पति की आय और भविष्य की कमाई को ध्यान में रखा. अदालत ने कहा कि पत्नी को वही जीवन स्तर (स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग) मिलना चाहिए, जैसा वह शादी के दौरान जी रही थी.  

 

यह मामला एक अपील से जुड़ा है, जिसमें पति अर्जुन मांझी (बदला हुआ नाम) ने पत्नी मंगली देवी (बदला हुआ नाम) से तलाक की मांग की थी. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट, बेरमो (बोकारो ) के फैसले को रद्द कर दिया और  विवाह को भंग घोषित किया.

 

हालांकि खंडपीठ ने कुछ शर्त भी लगाई है, जिसमें पति को अपनी पत्नी को 30 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता देना होगा. यह राशि तीन बराबर किस्तों में 12 महीने के अंदर चुकानी होगी. बेटे का पैतृक संपत्ति पर अधिकार बना रहेगा, वह कानून के अनुसार अपना हक मांग सकता है.

 

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क्या है मामला

दरअसल अर्जुन मांझी और मंगला देवी की शादी 15 जनवरी 1989 को संथाल रीति-रिवाज से हुई थी. शादी के बाद दोनों का एक बेटा भी हुआ. पति का दावा था कि 1992 में गांव की मांझी हाड़ाम समिति के सामने आपसी सहमति से अलगाव हो गया था.

 

इसके बाद पति ने दूसरी शादी भी कर ली. लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दूसरी पत्नी का नाम दर्ज कराने के लिए कोर्ट से तलाक जरूरी था. बेरमो, बोकारो के फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी, क्योंकि कानूनी रूप से वैध तलाक का प्रमाण नहीं था.

 

 

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