Ranchi : जेपीएससी में टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग कंपनी के मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी ने ना सिर्फ पांच-पांच परीक्षाएं पास की है, बल्कि उसके पास कई अलग-अलग डिग्रियां भी हैं. बताया जाता है कि अभय जिन-जिन परीक्षाओं में पास हुआ है, उन परीक्षाओं की अर्हताएं अलग-अलग थीं.
टीजीटी में चयन का मापदंड अलग था. जबकि फूड सेफ्टी अफसर, एफआरओ और एसीएफ के लिए भी अर्हताएं अलग थीं. इन सभी परीक्षाओं में बैठने के लिए अलग-अलग डिग्रियों की आवश्यकता थी.
आरोप है कि अभय तिवारी ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी से डिग्रियां खरीदी और अलग-अलग परीक्षाओं में इसका इस्तेमाल किया. यह भी आरोप है कि परीक्षा लेने वाली एजेंसी का प्रतिनिधि होने के कारण उसे इन परीक्षाओं को पास करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई.
अधिवक्ता राजीव कुमार का कहना है कि नौकरी के साथ-साथ प्राइवेट यूनिवर्सिटी के सर्टिफिकेट फर्जीवाड़े का भी बड़ा लिंक सामने आने वाला है. उनका कहना है कि अभय तिवारी ने ना सिर्फ अपना चयन करवाया, बल्कि अपने परिवार के कई सदस्यों और दोस्तों को भी सीजीएल व अन्य सरकारी विभागों में नौकरियां लगवाई.
आरोप लगाया कि टीएसआर कंपनी ने अभय तिवारी का मनोज तिवारी के नाम से इसलिए आईकार्ड जारी करवाया, ताकि पकड़े जाने पर एजेंसी कह सके कि अभय तिवारी मेरे प्रतिनिधि थे ही नहीं. बताया कि कंपनी के मालिक नौकरी फर्जीवाड़ा में पहले भी जेल जा चुके हैं.
अधिवक्ता राजीव कुमार का कहना है कि जेपीएससी के कॉन्फिडेंशल कमरे में अभय तिवारी के कई बार आने-जाने का सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित है. हाईकोर्ट में दायर क्रिमिनल रिट के तथ्य अगर सही पाए जाते हैं तो झारखंड में अब तक का सबसे बड़ा नौकरी फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है.
इस मामले में सिर्फ अभय तिवारी और एसपी सिंह ही नहीं, बल्कि जेपीएससी के कई अफसर भी जांच के दायरे में आ सकते हैं. मामले के खुलासे के बाद हजारों छात्र अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, ताकि जल्द से इस मामले की सुनवाई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो.
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