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मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर सौंदर्यीकरण : हाईकोर्ट ने DC से कहा-आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराएं

  • डीसी रामगढ़ हाई कोर्ट में हुए हाजिर
  • अगली सुनवाई में पर्यटन सचिव व डीसी को हाजिर रहने का निर्देश
  • मामले की अगली सुनवाई अब 25 मार्च को

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को रामगढ़ स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण से संबंधित मामले में कोर्ट के आदेश का अनुपालन को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई. 

 

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष रामगढ़ डीसी हाजिर हुए. उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि आदेश के अनुपालन के तहत कुछ कार्य हुए हैं और कुछ बचे हैं. करीब आठ चेंजिंग रूम बनाये गये हैं और मंदिर परिसर के आसपास स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की गई है. 

 

डीसी ने बताया कि मंदिर के आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखना और उसकी उचित सफाई के लिए कुछ कंपनियों के साथ एमओयू किया गया है. इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई में पर्यटन सचिव और रामगढ़ डीसी दोनों को हाजिर रहने का निर्देश दिया.

 

कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से आदेश के अनुपालन के तहत किए गए कार्यों के संबंध में रिपोर्ट मांगी है. अब मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी. 

 

 

खंडपीठ ने रामगढ़ डीसी से कहा कि मंदिर परिसर के आसपास के अतिक्रमण को हटाने के लिए अभियान चलाया जाए. मंदिर के पास नदी तट में रेड जोन  बनाकर घेराबंदी की जाए, ताकि किसी व्यक्ति के नदी में डूबने की घटना रोका जा सके.

 

प्रार्थी संजीव कुमार की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है. नदी तट से दूर स्थल पर चेंज रूम बनाया गया है. मंदिर परिसर के आसपास अतिक्रमण व्याप्त है, जिसे हटाया जाना चाहिए.

 
बता दें कि प्रार्थी ने अवमानना याचिका दाखिल कर झारखंड हाईकोर्ट द्वारा एक जनहित याचिका में 11 अगस्त 2023 को परित आदेश का अनुपालन कराने का आग्रह किया है. परित आदेश में हाईकोर्ट ने  झारखंड राज्य, पर्यटन विभाग, झारखंड पर्यटन विकास निगम और रामगढ़ जिला प्रशासन को 10 अनिवार्य निर्देश जारी किए थे.

 

इन निर्देशों में मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाटों का निर्माण, वस्त्र बदलने के कक्ष, शौचालयों की व्यवस्था, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सीय सुविधाएं सुनिश्चित करना, अतिक्रमण हटाना, नदी का चौड़ीकरण आदि शामिल हैं. 

 

 

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