Ranchi News : झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार ने 17 अगस्त जेएसएससी सीजीएल सहित टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है. सरकार के इस निर्णय के बाद आंदोलन के पहले चरण की बड़ी मांग पूरी हो गई हैं.
इस बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आंदोलन के अगले चरण और भविष्य की रणनीति के बारे में बताया है. उन्होंने कहा कि परीक्षाओं को रद्द करना आंदोलन के पहले चरण की जीत है. लेकिन इसे अंतिम जीत नहीं माना जा सकता. कहा कि छात्रों की लड़ाई अब ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाने की होगी, जिसमें भविष्य में पेपर लीक और किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश न रहे.
देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया कि परीक्षा रद्द होने के बाद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि अब आंदोलन का दूसरा चरण ‘रिफॉर्म’ यानी परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर शुरू हुआ है. कहा कि जब तक परीक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में स्पष्ट कदम नहीं उठाए जाते, तब तक छात्रों का धरना जारी रहेगा.
जेएलकेएम नेता ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 2 जुलाई से हुई थी. इसके बाद 21 जुलाई से सीआईडी जांच शुरू हुई और 25 जुलाई को बापू वाटिका से सत्याग्रह शुरू किया गया, जिसे बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक ले जाया गया. बताया कि 2 अगस्त से उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. इस दौरान विधानसभा घेराव, तिरंगा यात्रा और मशाल जुलूस समेत कई कार्यक्रम आयोजित किए गए.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल के दौरान अपनी बिगड़ी तबीयत का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अस्पताल में इलाज के दौरान स्थिति गंभीर हो गई थी और ब्रेन हैमरेज का खतरा तक पैदा हो गया था. इसके बावजूद उन्होंने युवाओं के भरोसे और आंदोलन की मांगों को देखते हुए संघर्ष जारी रखा.
उन्होंने सरकार, प्रशासन, मीडिया, मेडिकल टीम और आंदोलन में ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीके से सहयोग करने वाले लोगों का आभार जताया. साथ ही कहा कि भूख हड़ताल समाप्त हो गई है, लेकिन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना जारी रहेगा.
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि केवल परीक्षाएं रद्द करना और मामले की जांच सीबीआई, सीआईडी या एसआईटी से कराना ही छात्रों के लिए स्थायी समाधान नहीं है. उन्होंने भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में निगरानी समिति बनाने और पूरी प्रक्रिया का वित्तीय एवं प्रशासनिक ऑडिट कराने की मांग रखी. उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को किसी भी तरह के लाभ का माध्यम नहीं बनने दिया जाना चाहिए और हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए.
जेएलकेएम नेता ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को भी पूरी तरह गोपनीय बनाने की मांग की. उनके अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने के तीनों चरणों में काम करने वाले अधिकारियों के बीच आवश्यकतानुसार जानकारी सीमित रखी जाए, ताकि किसी एक स्तर पर मौजूद व्यक्ति को पूरी प्रक्रिया की जानकारी न हो. प्रत्येक चरण के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए लिखित क्लीयरेंस सर्टिफिकेट या एफिडेविट की व्यवस्था किए जाने की भी मांग की गई.
देवेंद्र ने कहा कि यदि मौजूदा कानूनी व्यवस्था परीक्षा संस्थाओं को पूरी तरह जवाबदेह बनाने में बाधा बनती है, तो सरकार को विधानसभा के माध्यम से आवश्यक कानून में बदलाव करने पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक छात्र का काम पढ़ाई करना और परीक्षा देना होना चाहिए, न कि परीक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ सड़क पर उतरना, लाठी खाना, एफआईआर झेलना या भूख हड़ताल करना. इसलिए अब आंदोलन का लक्ष्य ऐसी सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली तैयार कराना है, जिससे छात्रों को बार-बार आंदोलन करने की जरूरत न पड़े.
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