- एकमुश्त राशि 4 समान किश्तों में 12 माह के भीतर करने का निर्देश
Ranchi: हाईकोर्ट ने तलाक मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है. जिसमें कोर्ट ने तलाक की डिक्री को बरकरार रखते हुए अपीलकर्ता (पत्नी) के पक्ष में 40 लाख का एकमुश्त स्थायी भरण-पोषण देने का आदेश दिया है. स्थायी भरण-पोषण के लिए हाईकोर्ट ने पत्नी को बड़ी राहत दी.
हाईकोर्ट ने 40 लाख रुपये एकमुश्त स्थायी भरण-पोषण देने का निर्देश पति को दिया है. भुगतान की शर्तें में कहा गया है कि एकमुश्त राशि 4 समान किश्तों में 12 माह के भीतर करने का निर्देश है. पहली किश्त 1 माह के भीतर देनी है. यदि भुगतान नहीं होता है तो पत्नी को विधि अनुसार, न्यायालय जाने की स्वतंत्रता दी गई.
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हाईकोर्ट ने माना कि दोनों के बीच 30 से अधिक वर्षों का अलगाव रहा. पति-पत्नी 1990 से अलग रह रहे हैं. लगभग 35-36 वर्षों से वैवाहिक संबंध व्यवहारिक रूप से समाप्त हो चुके हैं. इतने लंबे समय बाद पुनर्मिलन की संभावना नहीं है. पत्नी ने स्वेच्छा से वैवाहिक घर छोड़ा. लंबे समय तक वह वापस नहीं लौटीं. पति के साथ वैवाहिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया. क्रूरता सिद्ध हुई. हाईकोर्ट ने यह भी माना कि झूठे आपराधिक मुकदमे दायर करना, लंबे समय तक पति से अलग रहना, वैवाहिक संबंध बहाल करने से इनकार करना, मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है.
हाईकोर्ट ने कहा कि पति का यह सर्वोपरि दायित्व है कि वह पत्नी को उस जीवन-स्तर के अनुरूप आर्थिक सुरक्षा प्रदान करे, जिसकी वह विवाह के दौरान हकदार थी. कोर्ट ने यह भी ध्यान रखा कि पत्नी की कोई स्वतंत्र आय नहीं है. पति निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. पति की अपनी आर्थिक जिम्मेदारियां भी हैं. फिर भी पत्नी के भविष्य की सुरक्षा आवश्यक है.
दरअसल सोनम देवी (बदला हुआ नाम) और रवि कुमार (बदला हुआ नाम) की शादी 29 मई 1984 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई.एक पुत्री का जन्म हुआ, जिसका विवाह 2007 में हो गया. पति का दावा था कि पत्नी शुरू से ही गांव में रहना नहीं चाहती थीं. पत्नी 1990 में नाबालिग बेटी को लेकर मायके चली गईं और फिर वापस नहीं लौटीं.
पति ने कई बार वापस लाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. पत्नी ने 1992 में घरेलु हिंसा का मामला दर्ज किया था. 2010 में पत्नी ने भरण-पोषण का मुकदमा दायर किया, जो समझौते से समाप्त हुआ और पति 5000 रुपये प्रति माह देने लगे. 2019 में पति ने हिंदु मैरिज एक्ट के तहत क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक का मुकदमा दायर किया.
फैमिली कोर्ट जामताड़ा ने पति की याचिका स्वीकार की थी. साथ ही क्रूरता और परित्याग सिद्ध माना था. विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी. पत्नी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में प्रथम अपील दायर की थी.
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