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Jamtara News :  108 एंबुलेंस नहीं मिलने पर मौत मामला, जांच में नेटवर्क प्रॉब्लम जिम्मेदार

Jamtara  :  जामताड़ा में एंबुलेंस नहीं मिलने से मरीज की मौत मामले में जांच रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य सहिया मीना मुर्मू ने टोल-फ्री नंबर 108 पर कॉल किया. लेकिन नेटवर्क प्रॉब्लम की वजह से सहिया की बात कॉल सेंटर तक नहीं पहुंच पाई. 

 

दरअसल गोपालपुर पंचायत के शहरबेड़ा गांव में समय पर 108 एंबुलेंस नहीं मिलने पर अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में मरीज की मौत हो गई थी. मामले में अखबारों में खबरें छपने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया और मामले की जांच करने का निर्देश दिया.

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह ने जांच पूरी कर अभियान निदेशक को रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में बताया गया है कि 14 जून की शाम करीब 7 बजकर 42 मिनट पर स्थानीय स्वास्थ्य सहिया मीना मुर्मू ने मरीज के परिजनों की बात सुनकर टोल-फ्री नंबर 108 पर कॉल किया.

 

कॉल सेंटर के रिकॉर्ड में वह कॉल दर्ज भी हुई. लेकिन वह एक साइलेंट कॉल थी यानी उसमें कोई आवाज नहीं थी. नेटवर्क प्रॉब्लम की वजह से सहिया की बात कॉल सेंटर तक नहीं पहुंच पाई और कुछ देर बाद कॉल अपने आप कट गई.

 

ऐसे में कॉल सेंटर को यह पता नहीं चल पाया कि कॉल किस जिले से आ रही है. क्योंकि सिस्टम में जिले की पहचान तभी होती है, जब कॉल पूरी तरह कनेक्ट होकर एंहुलेंस डिस्पैच की प्रक्रिया शुरू हो.

 

रिपोर्ट में बताया गया कि एंबुलेंस नहीं मिलने पर परिवार ने निजी गाड़ी का इंतजाम किया और मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचाया. लेकिन मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि वह अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ गया. इस दुखद घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री खुद पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और उनसे मुलाकात की.

 

 

विभाग ने एंबुलेंस के आंकड़े भी किए जारी

विभाग ने जांच रिपोर्ट के साथ आंकड़े भी जारी किए हैं. जामताड़ा जिले में कुल 14 एंबुलेंस आवंटित हैं, जिनमें से 13 इस वक्त पूरी तरह सक्रिय हैं. एक एम्बुलेंस पुरानी सेवा प्रदाता कंपनी से हैंडओवर की प्रक्रिया में है.

 

1 जून से 13 जून के बीच जामताड़ा में रोजाना औसतन 13 इमरजेंसी मामलों में एंबुलेंस भेजी गई. ग्रामीण इलाकों में एंबुलेंस का औसत रिस्पॉन्स टाइम 22 मिनट 46 सेकेंड और शहरी इलाकों में 20 मिनट 22 सेकेंड रहा.

 

पूरे राज्य की बात करें तो इसी अवधि में रोजाना औसतन 10,071 कॉल आईं और जरूरत के हिसाब से 471 एम्बुलेंस भेजी गईं. राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों का औसत रिस्पॉन्स टाइम 19 मिनट 35 सेकेंड और शहरी क्षेत्रों का 20 मिनट 23 सेकेंड रहा.

 

तकनीकी क्षमता और रिस्पॉन्स सिस्टम बेहतर बनाने का काम शुरू

इस घटना के बाद विभाग ने 108 एंबुेलेंस के कॉल सेंटर की तकनीकी क्षमता और रिस्पॉन्स सिस्टम को और बेहतर बनाने का काम शुरू किया है. राज्य नोडल पदाधिकारी ने अखबारों पत्रकारों से भी अपील की है कि एम्बुलेंस से जुड़ी कोई भी शिकायत की खबर चलाते वक्त कॉल करने वाले का मोबाइल नंबर और कॉल का समय जरूर शामिल करें, ताकि विभाग आसानी से जांच कर सके और ऐसी घटनाओ को रोका जा सके.

 

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