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JPSC-JSSC गड़बड़ी : परीक्षा माफिया अभय तिवारी व उसके गुरु मिथिलेश सिंह का देशभर में फैला है नेटवर्क

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, परीक्षा माफिया के एक बड़े नेटवर्क की परतें खुलती जा रही है. उपलब्ध दस्तावेज में ICN India के निदेशक मिथिलेश सिंह को परीक्षा माफिया अभय तिवारी का गुरु बताया गया है.
 
अभय तिवारी
  • बिहार से लेकर राजस्थान, झारखंड, यूपी, दिल्ली और हरियाणा तक पेपर लीक के मामलों में नाम
  • करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने का आरोप
  • गिरफ्तारी की खबर पर CID ने अब तक नहीं की पुष्टि

Jharkhand News :  झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, परीक्षा माफिया के एक बड़े नेटवर्क की परतें खुलती जा रही है. उपलब्ध दस्तावेज में ICN India के निदेशक मिथिलेश सिंह को परीक्षा माफिया अभय तिवारी का गुरु बताया गया है.

 

दस्तावेज में आरोप है कि मिथिलेश सिंह और अभय तिवारी का नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और दूसरे राज्यों तक फैला हुआ है.

 

इस बीच मिथिलेश सिंह को पकड़े जाने की बात सामने आई है. सूत्रों के अनुसार, उन्हें सादे लिबास में चार लोगों की टीम ने पकड़ा है. हालांकि CID की ओर से इस गिरफ्तारी के संबंध में अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

 

जांच एजेंसी के अधिकारियों ने मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी से इनकार किया है. ऐसे में उनकी वास्तविक स्थिति को लेकर अभी आधिकारिक तस्वीर साफ नहीं है.

 

उपलब्ध दस्तावेज में मिथिलेश सिंह पर प्रश्न-पत्र लीक कराने, OMR में छेड़छाड़ कराने और पैसे लेकर अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. दस्तावेज में दावा किया गया है कि इस नेटवर्क के जरिए वर्षों से अलग-अलग राज्यों की प्रतियोगी परीक्षाओं को निशाना बनाया जाता रहा है.

 

पहले आपने पढ़ा...

 

700 अभ्यर्थियों तक पहुंचा था झारखंड JE का पेपर

दस्तावेज में 3 जुलाई 2022 को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित जूनियर इंजीनियर परीक्षा का उल्लेख है. आरोप है कि परीक्षा का प्रश्न-पत्र करीब तीन दिन पहले ही लीक कर दिया गया था. इसके बाद बिहार और झारखंड में करीब 700 अभ्यर्थियों तक प्रश्न-पत्र पहुंचाया गया.

 

पेपर वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी. दस्तावेज में इस मामले में अभिषेक कुमार नाम के व्यक्ति की गिरफ्तारी का भी उल्लेख है. आरोप है कि वह इस नेटवर्क में सहयोगी की भूमिका में था और गिरफ्तारी के बाद जेल भेजा गया था.

 

OMR में छेड़छाड़ कर पास कराने का आरोप

दस्तावेज में वर्ष 2020 में रांची में प्रश्न-पत्र लीक और OMR में छेड़छाड़ कर सैकड़ों अभ्यर्थियों को गलत तरीके से पास कराने का आरोप लगाया गया है. दावा किया गया है कि इस पूरे खेल के जरिए अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये वसूले गए.

 

आरोप यह भी है कि परीक्षा की प्रक्रिया से जुड़ी कंपनियों और एजेंसियों के माध्यम से प्रश्न-पत्र और OMR तक पहुंच हासिल की जाती थी. इसके बाद कथित तौर पर OMR में छेड़छाड़ कर अभ्यर्थियों के परिणाम प्रभावित किए जाते थे.

 

JSSC से ब्लैकलिस्ट कंपनी, फिर भी टेंडर का आरोप

दस्तावेज में वर्ष 2023 के घटनाक्रम का भी उल्लेख है. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा एक कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद भी मिथिलेश सिंह की कंपनी ICN इंडिया के नाम पर JPSC से जुड़े परीक्षा कार्य का टेंडर हासिल करने का आरोप लगाया गया है.

 

दस्तावेज में आरोप है कि ICN India को JPSC परीक्षा का प्रश्न-पत्र छापने और OMR स्कैनिंग का काम मिला. आरोप लगाने वाले का दावा है कि प्रश्न-पत्र और OMR की प्रक्रिया में पहुंच मिलने का इस्तेमाल परीक्षा में गड़बड़ी के लिए किया गया.

 

28 जनवरी 2024 की परीक्षा भी घेरे में

दस्तावेज में 28 जनवरी 2024 को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा का भी जिक्र है. आरोप है कि इस परीक्षा का प्रश्न-पत्र राजस्थान के परीक्षा माफिया से मिलकर लीक कराया गया था. गया और औरंगाबाद इलाके में अभ्यर्थियों तक प्रश्न-पत्र पहुंचाए जाने का दावा किया गया है.

 

प्रश्न-पत्र वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी. इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े दिए हैं. सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रश्न-पत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले किस स्तर पर लीक हो रहे थे और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों तक बाहरी नेटवर्क की पहुंच कैसे बन रही थी.

 

राजस्थान से भी जुड़े हैं तार

दस्तावेज में राजस्थान के परीक्षा लीक मामलों का भी उल्लेख है. आरोप है कि मिथिलेश सिंह और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों ने राजस्थान में भी प्रश्न-पत्र लीक कराया.

 

दस्तावेज में एक साल पहले राजस्थान के पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड बताए गए मीणा की वाराणसी में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का भी उल्लेख किया गया है.

 

दस्तावेज के अनुसार, इस घटना को लेकर परीक्षार्थियों की ओर से मिथिलेश सिंह पर हत्या कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मौत के मामले में किसी की भूमिका को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता.

 

कई राज्यों में FIR और जेल जाने का दावा

दस्तावेज में मिथिलेश सिंह से जुड़े पुराने मामलों का भी उल्लेख किया गया है. इसमें तेलंगाना मेडिकल प्रवेश परीक्षा, राजस्थान RPSC परीक्षा, पंजाब में प्रश्न-पत्र लीक, हरियाणा में पेपर लीक और बिहार की परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों का हवाला दिया गया है.

 

दस्तावेज के मुताबिक, मिथिलेश सिंह कई बार प्रश्न-पत्र लीक के आरोपों में जेल जा चुका है. वर्ष 2011 में एम्स PG प्रवेश परीक्षा का प्रश्न-पत्र लीक और OMR में छेड़छाड़ के आरोप में CBI दिल्ली द्वारा गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया गया है.

 

करोड़ों की संपत्ति बनाने का आरोप

दस्तावेज में सबसे गंभीर आरोपों में से एक परीक्षा फर्जीवाड़े से अर्जित रकम से करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाने का है. आरोप है कि प्रश्न-पत्र लीक और परीक्षा में छेड़छाड़ से हासिल रकम के जरिए बिहार में जमीन, रांची में फ्लैट, दिल्ली के उत्तम नगर में घर और जमीन, मुंबई में कई फ्लैट और कार्यालय सहित कई संपत्तियां अर्जित की गईं.

 

इसके अलावा दिल्ली, गुरुग्राम, हरियाणा, राजस्थान और पुणे में भी जमीन और संपत्तियों का उल्लेख दस्तावेज में किया गया है. दस्तावेज में दावा किया गया है कि मिथिलेश सिंह के नेटवर्क ने परीक्षा फर्जीवाड़े से करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की. वहीं अभय तिवारी के संबंध में दस्तावेज में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया है.

 

अभय तिवारी का गुरु कौन?

JPSC और JSSC परीक्षा घोटाले की जांच के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभय तिवारी के पीछे कौन था. उपलब्ध दस्तावेज में इसका सीधा जवाब मिथिलेश सिंह के रूप में दिया गया है.

 

दस्तावेज में मिथिलेश सिंह को अभय तिवारी का गुरु बताते हुए आरोप लगाया गया है कि दोनों मिलकर परीक्षा प्रश्न-पत्र लीक और OMR में छेड़छाड़ का नेटवर्क चला रहे थे.

 

यानी झारखंड में सामने आया JPSC-JSSC परीक्षा घोटाला सिर्फ स्थानीय स्तर का मामला नहीं दिखता. दस्तावेज में जिस नेटवर्क का जिक्र है, उसके तार कई राज्यों की परीक्षाओं और पुराने पेपर लीक मामलों से जोड़ने का दावा किया गया है.

 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिथिलेश सिंह को पकड़े जाने की सूचना सही है, तो उन्हें किस एजेंसी ने पकड़ा, कहां रखा गया है और अब तक उनकी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि क्यों नहीं की गई?

 

फिलहाल CID अधिकारी उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं कर रहे हैं. इसलिए उनकी गिरफ्तारी को लेकर अंतिम स्थिति आधिकारिक बयान आने के बाद ही स्पष्ट होगी.

 

 

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