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Lagatar Breaking: सरकारी कर्मचारियों के मास्टर डाटा में छेड़छाड़, फर्जी निकासी के बाद SP बोकारो का खाता डिलीट

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  • - फर्जी निकासी के बाद बोकारो एसपी के नाम खुला बैंक अकाउंट जनवरी 2026 में डिलीट कर दिया गया.
  • - अलग-अलग अवधि के मास्टर डाटा में एक ही कर्मचारी की जन्म तिथि, योगदान की तिथि में बदला गया.
  • - एसपी के खाते में मई 2017 से नवंबर 2025 तक में 271 ट्रांजेक्शन के सहारे 15.98 करोड़ ट्रांसफर हुआ.

Ranchi: झारखंड में सरकारी कर्मचारियों के मास्टर डाटा (Employees Master Data) में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गयी है. इस छेड़छाड़ का उद्देश्य लंबे समय तक नौकरी मे बने रहने सहित अन्य प्रकार का लाभ लेना शामिल है. फर्जी निकासी के लिए एसपी बोकारो के बैंक खाते का इस्तेमाल करने के बाद उसे मास्टर डाटा से डिलीट (Delete) कर दिया गया. आंकड़ों के विश्लेषण में पाये गये इन तथ्यों की जानकारी महालेखाकार ने सरकार को लिखे अपने दूसरे पत्र में दी है. साथ ही इसे अत्याधिक गंभीर मामला बताते हुए सरकार के स्तर पर गहन जांच की अनुशंसा की है.

 

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15.98 करोड़ की फर्जी निकासी के बाद बोकारो SP का खाता डिलीट- livelagatar

सरकारी कर्मचारियों का मास्टर डाटा अत्यंत ही संवेदनशील आंकड़ा है. इसमें कर्मचारियों की जन्म तिथि, योगदान की तिथि, प्रोन्नति सहित अन्य ब्योरा होता है. मास्टर डाटा में छेड़छाड़ किया जाना असाधारण घटना है. महालेखाकार ने IFMS (INTEGRATED FINACIAL MANAGEMENT SYSTEM ) से जनवरी 2023 और जनवरी 2026 का मास्टर डाटा लिया. अलग-अलग अवधि के मास्टर डाटा में एक ही कर्मचारी की जन्म तिथि, योगदान की तिथि आदि में बदलाव पाया गया.

 

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कर्मचारियों की पहचान उसे आवंटित GPF नंबर से की जाती है. GPF एक यूनिक नंबर होता है, जो हर कर्मचारी का अलग-अलग होता है. महालेखाकार ने एक ही कर्मचारी के जनवरी 2023 और जनवरी 2026 के मास्टर डाटा के विश्लेषण में 2175 मामलों में जन्म तिथि में छेड़छाड़ पाया है. इन 2175 में से 1072 मामलों में जन्म तिथि एक दिन से 40 साल तक पीछे किया हुआ पाया गया. इसके अलावा 2175 में 1103 मामलों में जन्म तिथि एक से 40 साल तक आगे किया हुआ पाया गया.

 

मास्टर डाटा में छेड़छाड़ कर जन्म तिथि में बदलाव का ब्योरा

  • ⁠- 1072 मामलों में कर्मचारियों की जन्म तिथि एक दिन से 40 साल तक पीछे की गयी.
  • -⁠ 52 मामलों में कर्मचारियों की जन्म तिथि 10 से 40 साल तक आगे बढ़ाया गया.
  • - ⁠88 मामलों में जन्म तिथि पांच से 10 साल तक आगे बढ़ायी गयी.
  • - ⁠953 मामलों में जन्म तिथि एक दिन से पांच साल तक आगे बढ़ायी गयी.

 

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महालेखाकार ने जनवरी 2023 और जनवरी 2026 के कर्मचारियों के मास्टर डाटा के आधार पर योगदान की तिथि में की गयी छेड़ाछाड़ का पता लगाने के लिए GPF नंबर के आधार पर विश्लेषण किया गया. इसमें 5037 रिकॉर्ड में छेड़छाड़ पाया गया. आंकड़ों के विश्लेषण के दौरान योगदान की तिथि में एक दिन से 38 साल तक का अंतर पाया गया. इसके अलावा 572 कर्मचारियों के मामले में जनवरी 2023 और जनवरी 2026 के मास्टर डाटा में जन्म तिथि और योगदान की तिथि दोनों ही अलग-अलग पायी गयी.

 

योगदान की तिथि में छेड़छाड़ का ब्योरा

  • - 2215 कर्मचारियों के योगदान की तिथि को एक दिन से 38 साल तक पीछे किया हुआ मिला.
  • - 143 कर्मचारियों के मामलों में योगदान की तिथि 10-42 साल तक आगे बढ़ा हुआ पाया गया
  • - 207 कर्मचारियों के मामलों में योगदान की तिथि 5-10 साल आगे बढ़ा हुआ पाया गया
  • - 2472 कर्मचारियों के मामलों में योगदान की तिथि एक दिन से पांच साल तक आगे बढ़ा पाया गया.

 

महालेखाकार ने आंकड़ों के विश्लषण में पाया कि बोकारो के एसपी के नाम से खुले एक खाते में 15.98 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी की गयी. इसके बाद इस खाते को डाटा बेस से डिलीट कर दिया गया. IFMS से मिले आंकड़ों के विश्लेषण में महालेखाकार ने पाया कि बोकारो में बैंक अकाउंट नंबर 10854154749 को 14 GPF नंबर से जोड़ा गया. इस खाते से जोड़े गये 14 में से 13 GPF नंबर अलग-अलग लोगों के थे. इस बैंक खाते में एक GPF नंबर बोकारो के एसपी ऑफिस का जोड़ा गया. यह बैंक अकाउंट नंबर एसपी बोकारो का था.

 

रिपोर्ट के मुताबिक एसपी के खाते में मई 2017 से नवंबर 2025 तक की अवधि में 271 ट्रांजेक्शन के सहारे 15.98 करोड़ ट्रांसफर हुआ. यह ट्रांसफर 17 अलग-अलग Temporary Payee ID से संबंधित है. एसपी के खाते में ट्रांसफर 15.98 करोड़ में से जीएसटी में 63 लाख, यात्रा भत्ता में 2.71 करोड़, कंटिनजेंट बिल 12.48 करोड़, फॉरेस्ट के काम के लिए 17.34 लाख था. एसपी के इस खाते को जनवरी 2026 में डाटा बेस से डिलीट कर दिया गया.

 

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