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PESA नियमावली 2025 (7): इसपर उठे गंभीर सवाल

पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली 2025 (PESA नियमावली 2025) को लेकर आदिवासी समाज और जानकारों ने गंभीर आपत्ति जताई है. नियमावली के नियम 22 सहित कई प्रावधानों को पढ़ने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सामुदायिक और प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन आखिर किस ग्राम सभा के अधिकार में होगा.
 

 

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देव कुमार धान

पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली 2025 (PESA नियमावली 2025) को लेकर आदिवासी समाज और जानकारों ने गंभीर आपत्ति जताई है. नियमावली के नियम 22 सहित कई प्रावधानों को पढ़ने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सामुदायिक और प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन आखिर किस ग्राम सभा के अधिकार में होगा.


नियमों के अनुसार ग्राम सभा को अपने क्षेत्र में स्थित सामुदायिक और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है, लेकिन “पारंपरिक सीमा” की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने से भ्रम की स्थिति बनी हुई है. आशंका जताई जा रही है कि नए टोले अलग ग्राम सभा बनाकर पुराने राजस्व गांवों से अलग हो सकते हैं, जिससे वर्षों से सामूहिक रूप से उपयोग हो रहे संसाधनों पर कुछ सीमित समूहों का अधिकार हो जाएगा.


विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था आदिवासी समाज की पारंपरिक रीति-रिवाज, सामाजिक एकता और संसाधनों के साझा उपयोग की परंपरा को कमजोर कर सकती है. आलोचकों का आरोप है कि PESA नियमावली 2025 के कुछ प्रावधान PESA अधिनियम 1996 की मूल भावना के अनुरूप नहीं हैं और इससे गांव-गांव में विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है.


डिस्क्लेमर: (लेखक मांडर के पूर्व विधायक और बिहार सरकार में मंत्री रह चुके है)

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