Ranchi News : JPSC की 11वीं-13वीं परीक्षा रद्द होने के बाद अब इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि इंटरव्यू में गड़बड़ी और अभ्यर्थियों से पैसे लेने की शिकायतों के बीच पूरे मामले की जांच CID से कराना निष्पक्ष नहीं हो सकता.
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मरांडी ने कहा कि TDPL के रामवीर सिंह और अभय तिवारी की ओर से JPSC के इंटरव्यू बोर्ड को मैनेज करने की बात कहे जाने का दावा सामने आया है. उन्होंने यह भी कहा कि इंटरव्यू में अभ्यर्थियों से पैसे लेने के मामले में तत्कालीन JPSC सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रजराम की गिरफ्तारी हो चुकी है.
उन्होंने दावा किया कि रामवीर सिंह ने पूछताछ में बताया है कि कोड डिकोड कर अभ्यर्थियों को तत्कालीन JPSC अध्यक्ष और सदस्यों के बोर्ड में इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता था.मरांडी ने इंटरव्यू बोर्ड में शामिल अधिकारियों पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि CID के ADG मनोज कौशिक समेत कई IPS अधिकारी JPSC के इंटरव्यू बोर्ड का हिस्सा रहे हैं. ऐसे में अगर बोर्ड में शामिल अधिकारियों की भूमिका पर ही सवाल उठ रहे हैं, तो उसी जांच एजेंसी से मामले की निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है.
CBI जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर इंटरव्यू में गड़बड़ी या उसे मैनेज करने की बात सही है, तो इंटरव्यू बोर्ड में शामिल सभी अधिकारियों के बयान दर्ज होने चाहिए.
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच गहराई से होनी चाहिए और जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. मरांडी के अनुसार, CBI जांच से ही मामले की निष्पक्ष जांच और छात्रों का भरोसा कायम हो सकता है.

