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वकील मनोज टंडन केस :  HC के कार छोड़ने का आदेश न मानने पर DGP, डोरंडा थाना प्रभारी व रांची SP को हाजिर होने का निर्देश

  • हाई कोर्ट ने रांची सिविल कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने का दिया था निर्देश

Ranchi  : झारखंड हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति की कोर्ट ने डोरंडा थाना प्रभारी और रांची एसपी को सुबह 11:30 बजे कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने मामले में डीजीपी को भी वर्चुअल रूप से उपस्थित होने को कहा है.

 

अधिवक्ता मनोज टंडन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि गुरुवार को हाईकोर्ट के आदेश के बाद वे दस्तावेज के साथ डोरंडा थाना गए थे, लेकिन शाम छह बजे तक उनकी कार नहीं छोड़ी गई.

 

 

सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार और अधिवक्ता दीपंकर ने बताया कि रांची सिविल कोर्ट में सरकार की ओर से इससे संबंधित क्रिमिनल रिवीजन पर सुनवाई लंबित है. सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई है. 

 

सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अचयूत केशव और अधिवक्ता दीपंकर ने पक्ष रखा. 

 


दरअसल डोरंडा में एक मामूली सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले अधिवक्ता मनोज टंडन की कार जब्त कर ली गई है. 21 फरवरी को रांची सिविल कोर्ट ने मनोज टंडन की कार को छोड़ने का आदेश दिया था.

 

इसके बावजूद भी डोरंडा थाना ने उनकी कार नहीं छोड़ी. सरकार की ओर से मामले में सिविल कोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन दायर हुई है, जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई थी. कोर्ट में याचिका में हुई त्रुटि को दूर करने का निर्देश दिया था और मामले की सुनवाई 11 मार्च निर्धारित की है.

 

गुरुवार को एडवोकेटेड एसोसियेशन ने हाईकोर्ट  के न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की कोर्ट में इसे मेंशन किया था. इस दौरान कोर्ट ने अधिवक्ता मनोज टंडन के गाड़ी को छोड़ने को लेकर हस्तक्षेप याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की थी. 

 

आज कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट के गुरुवार के आदेश के आलोक में डोरंडा थाना में घंटों इंतजार करने के बाद और सिविल कोर्ट के आदेश के बाद भी मनोज टंडन की गाड़ी नहीं छोड़ी. 17 फरवरी को कार डोरंडा थाना की पुलिस ने सीज की थी. 10 दिन बीत जाने पर भी कार नहीं छोड़ी गई. 

 

 

 

 

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