Ranchi News: इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन ने अपने नाम पर म्यूटेशन से पहले ही जमीन बेचना शुरू कर दिया था. नियमानुसार जमीन बिक्री के लिए आवश्यक दस्तावेजों में से एक दस्तावेज लगान रसीद भी है. इसके बिना जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती है. लेकिन हुसैन बंधुओं ने अफसरों की मदद से बिना लगान रसीद के ही जमीन बेची. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा तेतुलिया वन भूमि घोटाले की जांच के दौरान इस बात की जानकारी मिली है.
तेतुलिया वन भूमि घोटाले की जांच के दौरान यह पाया गया कि इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर म्यूटेशन से पहले ही जमीन बेचना शुरू कर दिया था. म्यूटेशन से पहले तेतुलिया की वनभूमि बेचने के लिए तीन दस्तावेज का सहारा लिया गया. इसमें समीर महतो के नाम पर 1933 में पुरुलिया रजिस्ट्री कार्यालय से जारी नीलामी से संबंधित फर्जी दस्तावेज और गिफ्ट डीड शामिल है. फर्जी तरीके से पिछली तिथि पर बनाये गये गिफ्ट डीड में समीर महतो द्वारा नीलामी में खरीदी गयी जमीन, इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन को देने का उल्लेख किया था. इसके अलावा वन विभाग के Conservator Of Forest (CF) के हस्ताक्षर से जारी फर्जी अनापत्ति प्रामाण पत्र (NOC) का इस्तेमाल किया गया था.
ईडी की जांच में पाया गया कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर तेतुलिया मौजा की वनभूमि का म्यूटेशन आदेश 29 जून 2012 को जारी किया गया. यह म्यूटेशन आदेश चास अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी निर्मल कुमार टोप्पो ने जारी किया था. लेकिन इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन ने म्यूटेशन से पहले ही जमीन बेचना शुरू कर दिया था. हुसैन बंधुओं का नाम रजिस्टर-2 में दर्ज किये जाने से पहले ही जमीन की रजिस्ट्री कैसे हुई यह जांच का विषय है.
हुसैन बंधुओं द्वारा म्यूटेशन से पहले व बाद में बेची गयी जमीन का ब्योरा
| क्षेत्रफल | मूल्य | रजिस्ट्री | बेचने वाला | खरीदने वाला |
| 10 डिसमिल | 40 हजार | 7-4-2011 | हुसैन बंधु | कलीमुद्दीन अंसारी |
| 40 हजार | 4.50 लाख | 30-5-2012 | हुसैन बंधु | विनय कुमार |
| 25 डिसमिल | 4.50 लाख | 30-5-2012 | हुसैन बंधु | आशुतोष दूबे |
| 25 डिसमिल | 4.50 लाख | 30-5-2012 | हुसैन बंधु | सलोनी व दमयंती देवी |
म्यूटेशन से पहले हुसैन बंधुओं ने जमीन 4 से 18 हजार रुपये प्रति डिसमिल के रेट से बेची. अब तक की जांच के दौरान चार लोगों को म्यूटेशन से पहले जमीन बेचे जाने का मामला पकड़ में आया है. जिन चार लोगों को म्यूटेशन से पहले तेतुलिया स्थित वनभूमि बेची गयी, उसमें कलीमुद्दीन अंसारी, विनय कुमार, आशुतोष दूबे और सलोनी कुमारी व दमयंती देवी का नाम शामिल है. सलोनी कुमारी और दमयंती देवी से संयुक्त रूप से 4.50 लाख रुपये में 25 डिसमिल जमीन खरीदी थी.
जमीन खरीदने वाले किसी भी व्यक्ति ने जमीन से संबंधित दस्तावेज की जांच पड़ताल नहीं की थी. इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन ने नीलामी के फर्जी दस्तावेज के सहारे ही जमीन बेची थी. जमीन की बिक्री के दौरान वन विभाग द्वारा जारी फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया था. इसका उद्देश्य यह साबित करना था कि जमीन में किसी तरह का विवाद नहीं है.
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