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मेरी क्या गलती 5 :  3 सेंट्रल जॉब छोड़ झारखंड की सेवा चुनी, नीरज के सपनों के साथ माता-पिता की उम्मीदें भी टूटीं

Ranchi News :  सरकारी नौकरी के लिए युवा अक्सर अपने घर-परिवार से दूर जाने को तैयार रहते हैं. लेकिन पलामू के नीरज सिंह ने इसका उलटा रास्ता चुना. बेहतर सरकारी नौकरियों के कई मौके मिलने के बावजूद उन्होंने झारखंड में रहकर अपने राज्य की सेवा करने का फैसला किया. उन्होंने सोचा कि माता-पिता के करीब रहेंगे, परिवार का सहारा बनेंगे और सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनकर राज्य के विकास में योगदान देंगे. लेकिन अब सरकार के एक फैसले ने उनके इस सपने को ही अनिश्चितता में डाल दिया है.
 
  • हैदराबाद, मुंबई और रेलवे की नौकरी छोड़कर झारखंड में बने असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर
  • अब सरकारी फैसले से भविष्य पर संकट
  • किसान पिता के इकलौते बेटे की आंखों में सिर्फ एक सवाल
  • ‘मेरी गलती नहीं, तो सजा क्यों?’

Ranchi News :  सरकारी नौकरी के लिए युवा अक्सर अपने घर-परिवार से दूर जाने को तैयार रहते हैं. लेकिन पलामू के नीरज सिंह ने इसका उलटा रास्ता चुना. बेहतर सरकारी नौकरियों के कई मौके मिलने के बावजूद उन्होंने झारखंड में रहकर अपने राज्य की सेवा करने का फैसला किया. उन्होंने सोचा कि माता-पिता के करीब रहेंगे, परिवार का सहारा बनेंगे और सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनकर राज्य के विकास में योगदान देंगे. लेकिन अब सरकार के एक फैसले ने उनके इस सपने को ही अनिश्चितता में डाल दिया है.

 

नीरज सिंह वर्तमान में झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं.  लगातार न्यूज से बातचीत में उन्होंने बताया कि इससे पहले उनका चयन असिस्टेंट टैक्स कलेक्टर के पद पर भी हुआ था. इसके अलावा हैदराबाद में GST इंस्पेक्टर, हैदराबाद और मुंबई में पोस्टल असिस्टेंट और चक्रधरपुर रेल मंडल में टिकट कलेक्टर के पद पर भी उनका चयन हुआ था. इनमें से कई नौकरियां ऐसी थीं, जिन्हें पाने के लिए हजारों युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं. लेकिन नीरज ने इन अवसरों को छोड़कर झारखंड को चुना. उनका कहना है कि वह दूसरे राज्यों में जाकर नौकरी करने के बजाय अपने राज्य में रहकर सेवा करना चाहते थे.

 

अब तक आपने पढ़ा...

 

बेहतर विकल्प छोड़ चुना अपना राज्य

नीरज अपने परिवार के इकलौते बेटे हैं. उनके पिता किसान हैं और मां भी खेती-किसानी में उनका हाथ बंटाती हैं. ऐसे में परिवार के करीब रहकर नौकरी करना उनके लिए सिर्फ पसंद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी थी. रांची में नौकरी मिलने के बाद उन्हें लगा था कि अब वह माता-पिता के साथ रहकर नौकरी करेंगे और परिवार की जिम्मेदारियों को भी बेहतर तरीके से निभा सकेंगे.

 

वर्षों की मेहनत के बाद जब यह सपना पूरा हुआ, तो परिवार में भी खुशी का माहौल था. लेकिन भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार के हालिया फैसले के बाद नीरज के सामने फिर से भविष्य अधर में दिखाई दे रहा है. नीरज का सवाल है कि मैंने दूसरी नौकरियां छोड़कर अपने राज्य की सेवा करने का फैसला किया. क्या अपने राज्य की सेवा करना अपराध है? नीरज का कहना है कि वह किसी भी जांच से बचने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए. 

 

नीरज कहते हैं कि अगर मैंने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है तो सरकार मुझे बर्खास्त कर दे. लेकिन पहले मेरी जांच तो हो. बिना जांच पूरी वैकेंसी रद्द कर देना हमारे लिए न्याय नहीं है. उनका तर्क है कि अगर किसी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी की है, तो उनकी पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए. लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं होगा.

 

परिवार भी सदमे में

सरकारी फैसले के बाद नीरज का परिवार भी चिंता में है. जिस नौकरी को हासिल करने के लिए उन्होंने कई दूसरी नौकरियों को छोड़ने का फैसला किया था, अब उसी नौकरी का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है. नीरज के लिए सबसे बड़ा मलाल यह है कि जिस राज्य में सेवा करने के लिए उन्होंने दूसरे राज्यों और केंद्रीय संस्थानों की नौकरियों को छोड़ा, आज उसी नौकरी को लेकर उन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है.

 

दोषियों को सजा दें, निर्दोषों का भविष्य बचाएं

बातचीत के दौरान नीरज की आंखें कई बार नम हो गयीं. वह कहते हैं कि उनके लिए यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं है. इसके पीछे माता-पिता की उम्मीदें, परिवार की जिम्मेदारियां और वर्षों की मेहनत जुड़ी हुई है. नीरज की सरकार से मांग है कि भर्ती में अगर कोई गड़बड़ी हुई है, तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए.

 

लेकिन जिन कर्मचारियों या अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं है, उनके भविष्य और आजीविका की भी रक्षा की जाए. उनका कहना है कि वह जांच के लिए तैयार हैं और सरकार के सामने अपना पक्ष रखने का पूरा मौका चाहते हैं. नीरज ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि अगर मेरी कोई गलती नहीं है, तो मुझे सजा क्यों?

 

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