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मेरी क्या गलती 8: ट्यूशन पढ़ाकर सत्यम ने पायी नौकरी, अब परिवार के सामने आर्थिक संकट

Ranchi News: जेवियर कॉलेज, रांची से 2017 में 12वीं की पढ़ाई पूरी करने वाले सत्यम की कहानी संघर्ष, मेहनत और टूटती उम्मीदों की है. जेएसएससी सीजीएल 2024 में चयन के बाद करीब एक साल तक कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़कर उन्होंने जीत हासिल की. इसके बाद 31 दिसंबर 2025 को गुड़ू में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के पद पर योगदान दिया.
 

Ranchi News: जेवियर कॉलेज, रांची से 2017 में 12वीं की पढ़ाई पूरी करने वाले सत्यम की कहानी संघर्ष, मेहनत और टूटती उम्मीदों की है. जेएसएससी सीजीएल 2024 में चयन के बाद करीब एक साल तक कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़कर उन्होंने जीत हासिल की. इसके बाद 31 दिसंबर 2025 को गुड़ू में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के पद पर योगदान दिया. लेकिन महज छह महीने नौकरी करने के बाद उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई. अब सत्यम अपनी नौकरी वापस पाने के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं.

 

सत्यम एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उनकी पढ़ाई और तैयारी का खर्च आसानी से उठाया जा सके. वर्ष 2017 के बाद उन्होंने खुद अपने खर्च की जिम्मेदारी संभाली. रांची, पटना और 2023 में दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने होम ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्च निकाला.

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सरकारी नौकरी मिलने के बाद सत्यम परिवार के लिए आर्थिक सहारा बन गए थे. उन्होंने अपने छोटे भाई का रांची कॉलेज में पीजी डिप्लोमा (जीआईएस मैपिंग) में दाखिला कराया, लेकिन उसकी आधी फीस अभी भी बाकी है. सत्यम के मुताबिक, यह नौकरी उनके लिए सिर्फ करियर नहीं थी, बल्कि परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का जरिया थी.

 

उनके गांव के घर में आज भी पीने के पानी की सुविधा नहीं है. उनकी मां को कुएं से पानी लाकर घर का काम चलाना पड़ता है. ऐसे में नौकरी छिन जाने से परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर उनकी चिंता और बढ़ गई है.

 

सत्यम वर्ष 2021 से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. उन्होंने 2025 में यूपीएससी मेन्स परीक्षा भी दी थी. जेएसएससी में चयन और नौकरी ज्वाइन करने के बाद उन्हें लगा कि अब जीवन कुछ हद तक स्थिर हो गया है. इसी भरोसे उन्होंने इस साल जनवरी में होने वाली आईबी मेन्स परीक्षा भी नहीं दी और दूसरी सरकारी नौकरियों के फॉर्म भी नहीं भरे.

 

अब नियुक्ति रद्द होने के बाद सत्यम के सामने दोहरी चुनौती है. एक ओर नौकरी चली गई, वहीं दूसरी ओर भाई की फीस और परिवार के खर्च की जिम्मेदारी भी उनके सामने है. जिस नौकरी को उन्होंने लंबे संघर्ष के बाद हासिल किया था, वही आज उनके लिए न्याय की लड़ाई का कारण बन गई है.

 

सत्यम का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक मेहनत की, कानूनी लड़ाई लड़ी और नौकरी मिलने के बाद पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाई. अब उनकी मांग है कि सरकार उनके मामले पर दोबारा विचार करे और उन्हें न्याय मिले.

 

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