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लाला के ड्राइवर ने पूछताछ में ईडी के समक्ष खोली पुलिस और पत्रकारों की पोल

LAGATAR EXPOSE

Ranchi : कोयला किंग अनुप माजी उर्फ लाला के ड्राइवर ने ईडी द्वारा की गयी पूछताछ के दौरान पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों की पोल खोल दी. उसने बंगाल के तीन जिले के एसपी के बंगले पर पैसा पहुंचाने और पत्रकारों को भी पैसा पहुंचाने की बात स्वीकार की. साथ ही यह भी स्वीकार किया कि बाकुड़ा के थाना प्रभारी अशोक मिश्रा को वर्ष 2020 में पैसा पहुंचाया गया था. वाउचरों पर तारीख़ और महीना सही लिखा गया था, लेकिन साल 2020 के बदले जानबूझ कर 2010 लिखा गया था.

 

आयकर विभाग ने लाला व उससे जुड़े ठिकानों पर छापामारी के दौरान बाकुड़ा के थाना प्रभारी अशोक मिश्रा को 168.00 करोड़ रुपये देने से संबंधित ब्योरा और वाउचर जब्त किया था. आयकर विभाग ने इन वाउचरों सहित अन्य ब्योरों को जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को उपलब्ध कराया था. ED ने इन वाउचरों की जांच के दौरान पाया कि अशोक मिश्रा तो 2020 में बाकुड़ा में पदस्थापित था. लेकिन उसे पैसा पहुचाने के लिए जारी किये गये वाउचरों पर वर्ष 2010 लिखा था. ईडी ने अशोक मिश्रा को 2021 में गिरफ्तार किया था. उस वक्त भी वह बाकुड़ा में ही पदस्थापित था.

 

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ईडी ने जांच के दौरान अशोक मिश्रा को पैसा पहुंचाने वाले ड्राइवर बामा पद डे को पूछताछ के लिए बुलाया. पूछताछ के दौरान ड्राइवर ने यह जानकारी दी कि लाला और वह एक ही गांव के रहने वाले हैं. उसने लाला के यहां 2014 में नौकरी शुरू की. इसलिए उसके द्वारा 2010 में किसी को पैसा पहुंचाये जाने का सवाल ही नहीं उठता है. 

 

पूछताछ के दौरान बामा पद डे ने जानकारी दी कि वह 300-350 बार लाला के आदेश पर विभिन्न स्थानों पर पैसों से भरा Cartoon पहुंचा चुका है. लाला के पास मंहगी गाड़ियों का लंबा काफिला है. इसमें ऑडी, मर्सिडीज, टोयोटा, स्कॉरपियो सहित अन्य गाड़ियां है. वह स्कॉरपियो चलाता है.

 

पूछताछ के दौरान ईडी के अधिकारियों ने उसे थाना प्रभारी अशोक मिश्रा को पैसा पहुंचाने के लिए जारी किये गये वाउचरों को दिखाया. वाउचरों को देखने के बाद लाला के ड्राइवर ने उस पर अपना हस्ताक्षर होने की बाद स्वीकार की. उसने ईडी अधिकारियों को पूछताछ में बताया कि यह पैसे लाला के निर्देश पर उसके द्वारा पहुंचाये गये थे. लाला के ज्यादातर मैनेजर उसके गांव के ही लोग थे. जैसे रॉबिन कालाई, कार्तिक नंदी, सानु मलिक, सुरेश देव और पंकज दा वगैरह. पंकज दा कोलकाता स्थित कार्यालय में मैनेजर थे.

 

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ड्राइवर ने ईडी के दिये गये बयान में यह स्वीकार किया है कि लाला के निर्देश पर करोड़ों रुपये भामुरिया स्थित कार्यालय से कार्टून में भर कर उसने पहुंचाया था. इससे संबंधित वाउचर कोलकाता कार्यालय के मैनेजर पंकज दा ने जारी किया था. इस पर वर्ष गलत लिखा गया था. गलत वर्ष लिखने का कारण वही बता सकते हैं. उसने बाकुड़ा में पैसा वर्ष 2020 में पहुंचाया था. 

 

ड्राइवर ने अपने बयान में यह स्वीकार किया कि थाना प्रभारी अशोक मिश्रा कभी-कभी अपने सरकारी आवास पर पैसा लेते थे. कभी-कभी उनके बदले दूसरा व्यक्ति पैसा लेता था. ड्राइवर ने ईडी को दिये गये बयान में बाकुड़ा, पुरुलिया और बीरभूम के एसपी के बगले पर भी पैसा पहुंचाने की बात स्वीकार की है. इसके अलावा पत्रकारों को भी पैसा पहुंचाने की बाद स्वीकार की.

 

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लाला की व्यापारिक गतिविधियों के सिलसिले में ड्राइवर ने अपने बयान में यह कहा कि पहले वह समझता था कि लाला के पास कई कोयला खदान है. वह कोयला निकाल पर बाजार में बेचता है. बाद में उसे यह जानकारी मिली कि लाला कोयले का अवैध खनन और व्यापार भी करता है. इससे उसके पास भारी नकदी जमा होती है. वह अपनी व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए पुलिस, पत्रकार राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों को पैसा देता है.

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