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चपरासी के भरोसे चल रहा है बिरसा मुंडा चिड़ियाघर का प्रबंधन

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Ranchi : राजधानी रांची के ओरमांझी स्थित बिरसा मुंडा चिड़ियाघर का प्रबंधन आसिफ नाम के चपरासी के भरोसे चल रहा है. जब्बर सिंह चिड़ियाघर के निदेशक के पद के अतिरिक्त प्रभार में है. इसलिए वह कभी-कभी ही चिड़ियाघर पहुंचते है. रेंजर राम बाबू 10-10 रेज के प्रभार में हैं. इसलिए वह भी कभी-कभी ही आ पाते हैं. और महिला रेंजर गायत्री देवी की चलती ही नहीं है.

 

जानकारी के मुताबिक चिड़ियाघर में दर्शकों के लिए ऑनलाइन टिकट काटने का काम बंद कर दिया गया है. पिछले कई सालों से दर्शकों के लिए मैनुअल टिकट बुकिंग का सिलसिला चल रहा है. जिराफ की मौत की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार के आदेश पर पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) ने ऐसी समिति बनायी है, जिसमें Adl.PCCF स्तर के अधिकारी से जुड़े मामले की जांच उनसे निचले स्तर के अधिकारी करेंगें. ऐसे में जांच की वैधानिकता संदेहास्पद हो जायेगी.

 

बिरसा मुंडा चिड़ियाघर में निदेशक का प्रभार Adl.PCCF स्तर के अधिकारी जब्बर सिंह के पास हैं. दोहरे प्रभार में होने की वजह से वह कभी-कभी ही चिड़ियाघर आते हैं. राम बाबू की तो बात ही कुछ और है. जब अपने साले की कंपनी SATYAM & SHIVAM ENTERPRISES का बिल पास करना होता है तो हर कीमत पर हाजिर होते हैं. यही काम अपने प्रभार वाले दूसरे रेंज में भी करते हैं.

 

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भगवान बिरसा मुंडा चिड़ियाघर के चपरासी आसिफ का आलिशान मकान. (तस्वीर वैभव की)

 

चिड़ियाघर में गायत्री देवी नाम की एक महिला रेंजर भी पदस्थापित है. लेकिन चिड़ियाघर में उनकी कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं है. इसके अलावा कुछ फॉरेस्ट गार्ड भी तैनात हैं. लेकिन उनकी भूमिकी सीमित है. यहां आसिफ नाम का एक चपरासी है. वह सबका विश्वास पात्र है. इसलिए उससे अकाउंटेंट का काम लिया जाता है. निदेशक और रेंजर की अनुपस्थिति में उसी के भरोसे बिरसा मुंडा चिड़ियाघर का प्रबंधन चलता है.

 

राम बाबू के साले के दूसरे बिलों के भुगतान में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. यानी जब बड़े अफ़सर मौजूद नहीं होते हैं तो आसिफ ही निदेशक, आकाउंटेट और चपरासी भी होता है. चिड़ियाघर में अवैध कमाई की सारे दरवाजे खोल दिये गये हैं. राम बाबू का साला अवैध तरीके से LPG सिलिंडर तो सप्लाई कर ही रहा है. पिछले कई सालों से दर्शकों के लिए ऑनलाइन टिकट काटने का काम बंद कर दिया गया है. अब चिड़ियाघर में दर्शकों की इंट्री के लिए मैनुअल टिकट काटा जाता है. इससे दर्शकों के लिए निर्धारित इंट्री फीस की राशि में गड़बड़ी करना आसान हो जाता है.

 

चार सितंबर को बंगाल से लायी गई मादा जिराफ की मौत पर हंगामा होने के बाद वन विभाग ने इसे अत्यंत गंभीर मामला मानते हुए PCCF (वाइल्ड लाइफ) को जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है. सरकार द्वारा जारी इस आदेश के आलोक में PCCF ने निष्पक्ष जांच के नाम पर एक समिति का गठन कर दिया. इसमें एक DFO, CCF (वाइल्ड लाइफ) एसआर नातेश और रिटायर्ड ACF अर्जुन बड़ाईक का नाम शामिल है.

 

अर्जुन बड़ाईक रिटायटमेंड के बाद से PCCF( वाइल्ड लाइ) के कार्यालय में विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) के रूप में कार्यरत हैं. यानी जांच दल में शामिल सभी अधिकारी जब्बर सिंह से छोटे ओहदे के हैं. जबकि जिराफ की मौत का मामला चिड़ियाघर के प्रभारी निदेशक से जुड़ा है जौ Adl.PCCF स्तर के अधिकारी हैं.

 

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