Ranchi : हजारीबाग के विष्णुगढ़ में 12 साल की बच्ची की हत्या मामले में कोर्ट के स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की. मामले में राज्य सरकार की ओर से मृतक बच्ची के कपड़े और अन्य साक्ष्य, आरोपी एवं घटनास्थल से संबंधित एफएसएल जांच की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है. साथ ही सरकार ने बच्ची की मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट भी कोर्ट को दी है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज का अवलोकन किया. मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए कोर्ट ने 11 मई की तिथि निर्धारित की है.
बता दें कि हजारीबाग में 12 साल की बच्ची की हत्या मामले में हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से एफएसएल रिपोर्ट और मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट मांगी थी, जिसे आज कोर्ट को सौंपा गया है. मामले को लेकर हजारीबाग के विष्णुगढ़ थाना में कांड संख्या 42/2026 दर्ज किया गया है. जिसमें मृतक की मां रेशमी देवी,भीम राम सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
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पुलिस की ओर से तंत्र-मंत्र के कारण उसकी मां द्वारा अपनी बच्ची की हत्या किए जाने की बात कहकर आरोप लगाया जा रहा है. इसमें भीम राम ने उनका सहयोग किया था.
मामले की पहली सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात लाई गई कि यह मामला दिल्ली के निर्भया कांड की तरह है. इसमें बच्ची के प्राइवेट पार्ट के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया है. जिसपर कोर्ट ने कहा था कि यह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है, कोर्ट के समक्ष उक्त घटना से संबंधित पेपर की कटिंग प्रस्तुत की गई थी, जिसे कोर्ट ने गंभीर मामला मानते हुए तुरंत झालसा सचिव और हजारीबाग एसपी को वर्चुअल तलब किया था.
कोर्ट को बताया गया था कि बच्ची के मर्डर की घटना 24 मार्च को हुई. 25 मार्च को घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज हुई. देर से प्राथमिकी दर्ज करना दुर्भाग्यपूर्ण है. कोर्ट में वर्चुअल उपस्थित हजारीबाग एसपी से खंडपीठ ने पूछा था कि अब तक इस मामले में क्या अनुसंधान हुआ है?
मामले में साइंटिफिक जांच की गई है या नहीं? इस पर उनकी ओर से बताया गया कि अनुसंधान जारी है, मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी को पकड़ने की कोशिश की जा रही है. जिस पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि 6 दिन से अधिक का समय बीत गया और आरोपी को आपने अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया? मृतक बच्ची के कपड़े एवं अन्य साक्ष्य फॉरेंसिक के लिए भेजे गए हैं या नहीं? 5 दिन की देरी से फॉरेंसिक जांच प्रभावित हो सकती है. कोर्ट ने कहा कि अगर समाचार पत्रों के माध्यम से यह घटना सामने नहीं आती तो कोर्ट के समक्ष इसकी जानकारी नहीं हो सकती थी.
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