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लाला ने राजनीतिक संरक्षण के लिए विकास मिश्रा को 731 करोड़ रुपये दिये

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Ranchi : ईस्टर्न कोलफिल्डस लिमिटेड (ईसीएल) क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार करने वाले अनुप माजी उर्फ लाला ने विकास मिश्रा को राजनीतिक संरक्षण के लिए 731 करोड़ रुपये दिये थे. विकास मिश्रा, राजनीतिक हलकों में अपना दबदबा रखने वाले विनय मिश्रा का भाई है. विकास मिश्रा, मिश्रा परिवार के नाम पर बनीं कंपनियों और वित्तीय लेनदेन को मैनेज करता था. महंगी अचल संपत्ति खरीदने के लिए नन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) से बिना गारंटी के करोड़ों का कर्ज लेने का दावा किया. हालांकि जांच में इसे गलत पाया गया.

 

लाला से जुड़े ठिकानों पर छापामारी के दौरान मिले दस्तावेज में छोटू नामक व्यक्ति को कुल 731 करोड़ रुपये देने का उल्लेख था. छोटू नामक इस व्यक्ति को यह रकम दो बार में दी गयी थी. 2018-19 में छोटू को 218 करोड़ और 2019-20 में 513 करोड़ रुपये दिये गये थे. छोटू को पैसा देने का ब्योरा लाला के करीबी CA नीरज सिंह द्वारा लिखे गये हिसाब-किताब में दर्ज थी. इस ब्योरे के आधार पर जांच एजेंसी ने छोटू की तलाश की और उसे दिल्ली से गिरफ़्तार किया. जांच में पता चला कि छोटू कोई और नहीं बल्कि विकास मिश्रा है. वह बंगाल की राजनीतिक हलको में ऊंची पहुंच रखने वाले तेना विनय मिश्रा का भाई है.

 

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विकास मिश्रा ने पूछताछ के दौरान अनुप माजी से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया. लेकिन थाना प्रभारी अशोक मिश्रा ने यह स्वीकार किया था कि लाला के निर्देश पर विनय मिश्रा के लिए प्रतिमाह औसतन 3-4 करोड़ रुपये उसके भाई विकास मिश्रा को दिया जाता है. विकास मिश्रा ने पूछताछ के दौरान खुद को M/S LTB Infra consultants Pvt.Ltd का निदेशक और शेयर होल्‍डर बताया. इस कंपनी के शेयर होल्डर्स में विनय मिश्रा, सहित अपने अन्य पारिवारिक सदस्यों का नाम लिया. साथ ही खुद के अन्य अनेकों कंपनियों में निदेशक के रूप में काम करने की बात कही. 

 

विकास मिश्रा ने LBT Infra के माध्यम से ऑनलाईन मार्केटिंग, सहित अनके प्रकार का काम किये जाने का दावा किया. हालांकि जांच में पाया गया कि इस कंपनी में कुल नौ लोग ही कार्यरत हैं. इतने कम लोगों के सहारे कई तरह की व्यापारिक गतिविधियों को अंजान देना संभव नहीं था. उसने उत्तर प्रदेश में जमीन होने और कृषि से सालाना 14-15 लाख रुपये कृषि आमदनी का दावा किया. लेकिन जांच के दौरान वह जमीन से संबंधित किसी तरह का दस्तावेज पेश नहीं कर सका.

 

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उसके ठिकानों से मिले दस्तावेज को देखने के बाद उसने यह स्वीकार किया कि उसे उसने ही लिखा है. उसने यह भी स्वीकार किया कि LBT के नाम पर एक संपत्ति खरीदे जाने का सौदा तय किया गया है. यह संपत्ति M/S West End Pigment और M/S Deshpran Properties से खरीदना है. इस संपत्ति के लिए 6-7 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. इन कंपनियों से 14 करोड़ की लागत पर जमीन खरीदने का फैसला किया गया है. इस जमीन पर एक होटल बनाने की योजना है. इसकी लागत 150 करोड़ रुपये आंकी गयी है. उसने मिश्रा परिवार द्वारा बनायी गयी कंपनियों के Authorised Signatory होने की बात स्वीकार की. कोलकाता के पॉश इलाके में आवासीय भवन खरीदने के लिए पैसे कहां से आये? इस सवाल के जवाब में उसने विभिन्न नन बैंकिग संस्थाओं से कर्ज लेने की जानकारी दी.

 

उसने M/S Nu-Ruchi नामक नन बैंकिंग कंपनी से एक करोड़ रुपये कर्ज लेने की दावा किया. इसी कंपनी से अपनी मां ललिता मिश्रा के नाम पर 50.00 लाख, पारिवारिक सदस्यों नेहा मिश्रा के नाम पर 1.05 करोड़ कर्ज लेने का दावा किया. इस कंपनी ने करोड़ों का कर्ज बिना गारंटी के ही दिये थे. साथ ही कर्ज की रकम वापस करने के लिए कोई प्रक्रिया जैसे EMI आदि निर्धारित नहीं किया गया था. हालांकि जांच में पाया गया कि मिश्रा के पारिवारिक सदस्यों के खाते में भारी नकदी जमा की गयी थी. 

 

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इडी ने जांच में पाया कि लाला से मिली नकदी को शेल कंपनियों से इंट्री के सहारे लेयरिंग करते हुए मिश्रा के पारिवारिक सदस्यों और कंपनियों के खातों मे जमा किया गया था. इसी पैसों से चल-अचल संपत्ति खरीदी गयी थी. साथ ही इसे मिश्रा परिवार के नाम पर बनी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया था.

 

LBT Infra Consultant में लेयरिंग के बाद जमा रकम का ब्योरा

पैसा जमा करने वाली कंपनी  राशि
इंडियन केबल नेट  15.88 करोड़
कोलकाता कम्यूनिकेशन  2.37 करोड़
उषिता ट्रेडिंग एजेंसी   4.24 करोड़
गुनार इंटरप्राइजेज   2.00 करोड़
रविशिंद डीलकॉम  2.00 करोड़
श्याम स्टील   1.28 करोड़
जेएसएस कॉरपोर्ट   5.50 करोड़
एसके कम्यूनिकेशन   1.62 करोड़
एविड्स टेक्नोवेटर्स   3.75 करोड़
गोदावरी नेचुरल रिसोर्स   11.50 करोड़
मंगलम मेटल   8.03 करोड़

 

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