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तेतुलिया लैंड स्कैम:  हुसैन बंधुओं के दादा के नाम जारी लगान रसीद भी निकला फर्जी

Jharkhand News: ईडी ने जांच में पाया कि इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन के नाम पर वर्ष 2012-13 में म्यूटेशन करने के लिए उसके दादा के नाम पर कायम जमाबंदी का सहारा भी लिया गया था. हुसैन बंधुओं के दादा समीर महतो के नाम पर जारी जमाबंदी नंबर 70 का सहारा लिया गया था. ईडी ने इस जमाबंदी की जांच की. इसमें इसे फर्जी पाया गया. फर्जी तरीके से तैयार इस जमाबंदी को 5-2-1962 को खोला गया था.
 
  • घोटाले के किंगपिन शैलेश कुमार सिंह ने जमीन की खरीद बिक्री के लिए Sales Executive और Project Head नियुक्त कर रखा था.
  • दस्तावेज बॉल पेन से लिखा गया था. जबकि वर्ष 1962 में सरकारी कामकाज में बॉल पेन के इस्तेमाल का प्रचलन नहीं था.

Ranchi News: तेतुलिया लैंड में हुसैन बंधुओं के दादा के नाम का जारी लगान रसीद भी फर्जी निकला. घोटाले के किंगपिन शैलेश कुमार सिंह ने जमीन की खरीद बिक्री के लिए Sales Executive और Project Head नियुक्त कर रखा था. दोनों ही नियुक्तियां मौखिक थी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में इसकी पुष्टि हुई.


ईडी ने जांच में पाया है कि इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन के नाम पर वर्ष 2012-13 में म्यूटेशन करने के लिए उसके दादा के नाम पर कायम जमाबंदी का सहारा भी लिया गया था. हुसैन बंधुओं के दादा समीर महतो के नाम पर जारी जमाबंदी नंबर 70 का सहारा लिया गया था. ईडी ने इस जमाबंदी की जांच की. इसमें इसे फर्जी पाया गया. फर्जी तरीके से तैयार इस जमाबंदी को 5 फरवरी 1962 को खोला गया था. इसे चास के तत्कालीन अंचल अधिकारी द्वारा खोलने का उल्लेख किया गया था.

 

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इस जमाबंदी में जमीन का क्षेत्रफल 138.20 एकड़ होने का उल्लेख किया गया था. जांच के दौरान इस जमाबंदी से संबंधित दस्तावेज पर किसी सक्षम अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं पाया गया. हस्ताक्षर के बदले सिर्फ एक वाक्य लिखा पाया गया. इससे जुड़े पर सिर्फ “अंचल अधिकारी के आदेश से”  लिखा हुआ पाया गया. इस जमाबंदी से जुड़े दस्तावेज पर “केस नंबर” भी नहीं लिखा था. दस्तावेज बॉल पेन से लिखा गया था. जबकि वर्ष 1962 में सरकारी कामकाज में बॉल पेन के इस्तेमाल का प्रचलन नहीं था.


इसी जमाबंदी नंबर 70 के आधार पर लगान रसीद जारी दिखाया गया था. समीर महतो के नाम के इस जमाबंदी के लिए लगान रसीद नंबर 440754 जारी दिखाया गया था. लगान रसीद 18 फरवरी 1966 की तिथि से जारी किया गया था. धनबाद स्थित रिकॉर्ड रुम से इस रसीद की जांच की गयी. जांच के दौरान धनबाद स्थित रिकॉर्ड में इस तरह का कोई लगान रसीद नहीं पाया गया. 


जांच के दौरान 1966 की अवधि में धनबाद स्थित रिकॉर्ड रूम में पाये गये दूसरे लगान रसीद के साथ समीर के नाम पर जारी लगान रसीद का मिलान किया गया. रिकॉर्ड रुम में पाये गये लगान रसीद पर कर्मचारी के हस्ताक्षर और लिखावट, समीन महतो के नाम पर जारी लगान रसीद से बिल्कुल अलग पाया गया. इससे 1962 की जमाबंदी नंबर 70 और संबंधित लगान रसीद के फर्जी होने की पुष्टि हुई.

 

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ईडी ने जांच में पाया कि तेतुलिया जमीन घोटाले के किंगपिन शैलेश कुमार सिंह ने जमीन की खरीद बिक्री के लिए एक Sales Executive और Project Head नियुक्त कर रखा था. Sales Executive का नाम लक्ष्मी कुमारी और Project Head का नाम किशोर किस्कू है. लक्ष्मी कुमारी को आठ हजार रुपये महीना मिलता था. वह जमीन बेचने के लिए लोगों को 5.50 लाख रुपये प्रति डिसमिल का प्रस्ताव देती थी. Project Head का काम जमीन की बिक्री से मिली राशि का हिसाब रखना था. वह जमीन की बिक्री के दौरान वह सिर्फ सर्किल रेट के हिसाब से जमीन का मूल्य चेक से या अकाउंट में लाता था. बाकी पैसा नकद लेता था.

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