झारखंड गठन के साथ ही यहां नियुक्तियों में भ्रष्टाचार किया जाने लगा था. पैसा लेकर उम्मीदवारों का चयन करना, नाते-रिश्तेदारों को टॉप करना, नेताओं-अफसरों के सगे-संबंधियों को नियुक्त करना, यह सब बेरोक-टोक चलता रहा. हर बार हो-हल्ला मचा. जांच हुई. पर कार्रवाई नहीं. कार्रवाई के नाम पर कुछ लोग जेल गए. जिन्हें नौकरी मिली, वो अब भी ऐश कर रहे हैं. समझिये, किस तरह झारखंड में "करप्शन जिंदाबाद" का नारा चलता रहा. नेता-अफसर मालामाल होते रहै और योग्य युवा को जूते की नोंक पर रखा जाता रहा.
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