इतिहास को मरोड़ने से नाकारापन नहीं छिपती
कभी-कभी ऐसा प्रतीत होने लगता है कि हमारा देश संभवत: आदिम युग में पहुंच गया है और चूंकि देश अभी सौ फीसदी शिक्षित नहीं हो पाया है, इसलिए समाज को चाहे जैसे भी हो, इतिहास की अच्छी बुरी बातों से उसे भ्रमित करके रखा जाए. यही बात राजनीतिज्ञों को लाभ पहुंचता है और सही जानने और बताने वाला बगलें झांकने लगता है. आज यह एक आम बात हो गई कि अपनी भाषा प्रवाह में प्रवाहित करके जो समाज का जितना मस्तिष्क 'साफ' कर सकता है, कर दे.
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