महालेखाकार को हिसाब-किताब देने में स्वायत्त संस्थाओं की आनाकानी
नियमानुसार इन संस्थाओं को अपना सालाना लेखा जोखा तैयार कर महालेखाकार को ऑडिट के लिए देना है. इसका उद्देश्य संबंधित संस्थाओं के फंड के इस्तेमाल और उसकी उपयोगिता का पता लगाया जाना है. लेकिन इन संस्थाओं द्वारा अपना लेखा जोखा महालेखाकार को नहीं देने की वजह से इस संस्थाओं द्वारा किये गये खर्च की उपयोगिता का आकलन नहीं हो पा रहा है. कुछ संस्थाओं ने अपना लेखा-जोखा जमा किया लेकिन सक्षम पदाधिकारी के हस्ताक्षर के बिना जमा किये गये लेखा जोखा को महालेखाकार ने अस्वीकार कर दिया है.
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