योजनाओं से जमीनी सच्चाई तक: झारखंड हेल्थ सिस्टम का पूरा साल
एक और साल अपने अंतिम पलों में खड़ा है. कैलेंडर की आखिरी तारीख पर जब पीछे मुड़कर देखा जाता है, तो झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था एक ऐसी लंबी कहानी की तरह सामने आती है, जिसमें कहीं नई इमारतों की नींव दिखती है, कहीं एम्बुलेंस की सायरन समय पर नहीं पहुंच पाती, कहीं आधुनिक मशीनें उम्मीद जगाती हैं और कहीं लापरवाही भरोसे को तोड़ती है.
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