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ओपिनियन

बिहारः दंगल से पहले अखाड़ियों की वर्जिश

दशहरे के बाद जब चुनाव की घोषणा होगी, तो गठबंधन आधार ले लेंगे, सीटें बंट जायेंगे, उम्मीदवारी तय होने लगेगी और जनसभाएं, रैलियां शुरु हो जायेंगे, तब तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगेगी. यह चुनाव देखने और समझने लायक होगा. इसलिए चुनावों में दिलचस्पी लेने वाले विश्लेषक और राजनीतिज्ञों को इस बार का बिहार चुनाव बहुत कुछ सिखा देगा.

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हे भगवान- ऐसे मित्र व ऐसी मित्रता किसी को ना मिले

एक तरह से अमेरिका में रह रहे और जाने वाले प्रोफेशनल्स को घुसपैठिया कह दिया गया. घुसपैठिया किसे कहते हैं, यह तो आप सब जानते ही हैं. ऐसे ही मित्रों और ऐसी ही मित्रता को देखते हुए कहा गया है- हे भगवान- ऐसे मित्र व ऐसी मित्रता किसी को ना मिले. बाकी गर्व करते रहिये. डंका तो बज ही रहा है.

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DGP कार्यालय ने गिरफ्तार क्यों नहीं कराया वांटेड राजेश राम को! रंजीत क्यों मांग रहा था ओड़िसा के कारोबारी का नंबर!

वांटेड राजेश राम पुलिस मुख्यालय के जिस अफसर से भी मिलता था, उसने उसे गिरफ्तार क्यों नहीं कराया? क्या ऐसा नहीं करके उस अफसर ने कर्तव्य के प्रति लापरवाही नहीं बरती? क्या उसे गिरफ्तार नहीं कराना विभागीय कार्यवाही और सीआरपीसी की धाराओं के उल्लंघन का नहीं बनता है?

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अंधी सुरंग में कसमसाता नेपाल

नेपाल में सुशीला कार्की ने सत्ता संभाल ली है. उन्होंने अपनी कैबिनेट में तीन लोगों को शामिल कर लिया है. ओमप्रकाश अरियाल को गृह मंत्री के साथ-साथ कानून मंत्री बनाया है. रामप्रसाद खनाल वित्त और कुलभान घिसिंग उर्जा विभाग देख रहे हैं. लेकिन नेपाल की ओली सरकार गिरानेवाले युवाओं (जैन-जी) के एक समूह ने गृह मंत्री अरियाल के विरुद्ध हल्ला बोल दिया है. इस समूह के नेता सुदन गुरुंग ने न केवल अरियाल को हटाने के लिए पीएम आवास पर प्रदर्शन किया, बल्कि कहा कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गयी तो कार्की को वहीं भेज दिया जायेगा जहां से लाया गया है.

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शैक्षणिक डिग्री निजी और गोपनीय!

हालांकि यह खबर अब बासी हो चुकी है, लेकिन यह फैसला कुछ जमा नहीं!  लगता नहीं कि डिग्री का यह भूत आसानी से मोदी जी का पीछा छोड़ेगा. वैसे भी यह हाईकोर्ट का फैसला है, सुप्रीम कोर्ट में पलट भी सकता है. कायदे से पलटना ही चाहिए!

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इथेनॉल मिलावटखोरी और मुनाफाखोरी राष्ट्रीय उद्यम है

लूटतंत्र लंबा चले, इसलिए रेलवे को मारकर, बीमार करके, लोगों को हाइवे पर चलाने बनाने का काम भी जोरों पर है. हाइवे ठेकों का क्या गणित है, उस पर फिर कभी बात करेंगे. एक दौर में समाजवादी मूर्ख सरकारें मुनाफाखोर और मिलावटखोर पर छापे मारती थी, उन्हें जेल भेजती थी. तंग आकर उन लोगों ने एक पार्टी बनाई, 40 रुपये में तेल देने का सपना दिखाकर सत्ता में आये और अब मिलावटखोरी और मुनाफाखोरी राष्ट्रीय उद्यम है.

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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस या ईज ऑफ डूइंग पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा

जब कॉरपोरेट कंपनियां किसी नेता की ब्रांडिंग करने लगती है, तो सत्ता और पूंजी के बीच पारस्परिक लाभ का संदेह गहराता है. सरकार की नीतियों का उद्देश्य सुधार से कहीं अधिक राजनीतिक ब्रांडिंग तो नहीं है. हालात यह है कि भारत की बड़ी कंपनियां विज्ञापनों की वजह से "पीएम ब्रांडिंग एजेंसी" बनी गई है. जब टूथपेस्ट से लेकर कार तक के विज्ञापन में "मोदी जी का तोहफा आपके घर तक" लिखा जाने लगा है. ऐसा लगने लगा है कि जीएसटी में छूट ने कॉरपोरेट कंपनियों को चाटुकारिता का नया मौका दे दिया है.

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'काली दाल' की जांच कराने से क्यों हिचक रही सरकार

देश के राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) का निर्णय लिया, जिसकी शुरुआत बिहार से की गई. कारण था कि कुछ महीने बाद वहां विधानसभा का चुनाव होने वाला है. चूंकि इसमें कोई ऐसी विशेष बात नहीं थी, इसलिए किसी को इसमें कुछ आपत्तिजनक भी नहीं लगा था.

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मीडिया को लेकर नेपाल से जो वीडियोज आ रहे हैं, गलत है, पर जिम्मेदार हम ही हैं

मीडियाकर्मियों से बदसलूकी, मारपीट, सरकारी सिस्टम का इस्तेमाल कर जेल भेजने की घटनाएं भारत में भी कम नहीं होती. पर, नेपाल जैसी शायद नहीं. इन हालातों के लिए जिम्मेदार कौन हैं. मुझे यह मानने में कतई झिझक नहीं है कि इसके लिए जिम्मेदार हम पत्रकार और मीडिया संस्थान के मालिकान व प्रबंधन ही हैं.

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तस्वीर नेपाली युवक की-वर्दी रूसी फौज की

भारत मे अग्निवीर लागू है. 10 साल के भीतर दुनिया के कांफ्लिक्ट जोन में हमारे बच्चे लड़ते दिखेंगे. ट्रेंड और बेरोजगार वे दुनिया को असुरक्षित बनाने में योगदान देंगे. फटेहाल घरवालों को रेमिटेंस (वेतन के रुप में मिली नकद राशि) भेजेंगे. तब, तस्वीर आपके बेटे की होगी और वर्दी विदेशी फौज की.

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नेपाल का संदेशः टैक्स हमारा, रईसी तुम्हारी

श्रीलंका के बाद बंग्लादेश. बंग्लादेश के बाद नेपाल. नेपाल के बाद फ्रांस. हर जगह एक ही जैसा नारा- टैक्स हमारा, रईसी तुम्हारी. एक ही जैसी समस्या- नेपोटिज्म, असमानता, बेरोजगारों की फौज. यह सब नहीं चलेगा. सब जगह एक ही जैसे सवाल. एक ही जैसा गुस्सा- नेताओं के खिलाफ, उद्योगपतियों के खिलाफ. आखिर पूरी दुनिया में इस तरह का आक्रोश क्यों भड़क रहा है?

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मामला मजहबी नहीं, निखालिस तेजाबी है

पिछले कुछ वर्षों से यह नारा बेहद अफसोसनाक तरीके से सिर्फ उकसावे के मकसद से जहां-तहां लगाया जा रहा है. लेकिन इस्लाम के आलिमों ने इसकी पुरजोर मजम्मल करना मुनासिब नहीं समझा. नतीजा यह हुआ छह सितंबर को भोपाल में गणेश प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा पर पथराव हो गया. कुछ प्रतिमाएं खंडित हो गईं और कुछ श्रद्धालु चोटिल हो गए. कहा जा सकता है कि शासन प्रशासन की काहिली या नामुश्तैदी का नतीजा है. लेकिन क्या हमारे पर्व-त्योहार संगीनों के साये में ही संपन्न होंगे?

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रांची की स्वास्थ्य सेवाएं खुद ICU में, सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत

झारखंड की राजधानी रांची में बीते दो वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती रही है. सरकारी और निजी अस्पतालों की लापरवाही, उपकरणों की खराबी और एंबुलेंस सेवाओं के संकट ने मरीजों की जान के लिए खतरा पैदा कर दी है. अदालत और सरकार के आदेशों के बावजूद स्थिति में सुधार की जगह हालात बिगड़ते जा रहे हैं.

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युद्ध लड़ा नहीं, थोपा जाता है

युद्ध लड़ा नहीं जाता थोपा जाता है. भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में हमेशा युद्ध थोपा ही गया है. इतिहास गवाह है कि विश्व के कई बलशाली देशों द्वारा कमजोर देशों पर आज तक युद्ध थोपा ही गया है

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बिहार में उबाल, गुजरात में शांति!

एनडीए के लोग, खुद नीतीश कुमार जिस तरह लोगों को ‘जंगल राज’ की वापसी का डर दिखा रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि उनको  ‘सुशासन’ के नाम पर वोट मिलने का बहुत भरोसा नहीं है!

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